भारतीय संस्कृति में नारियल का खास महत्व : सुमेर

सामाजिक संस्था सागर भक्ति संगम की ओर से नारियल दिवस पर झील परिसर में विचार गोष्ठी हुई.

नारियल के आर्थिक, पर्यावरणीय, धार्मिक और पोषण की महत्ता विषयक गोष्ठी

हजारीबाग.

सामाजिक संस्था सागर भक्ति संगम की ओर से नारियल दिवस पर झील परिसर में विचार गोष्ठी हुई. नारियल के आर्थिक, पर्यावरणीय, धार्मिक और पोषण की महत्ता विषयक गोष्ठी के संयोजक विजय केसरी थे. मुख्य वक्ता सुमेर सेठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारियल या श्रीफल को शुभ और सबसे पवित्र फल माना गया है. सामाजिक, धार्मिक अनुष्ठान समेत किसी भी प्रकार की पूजा और अन्य कर्मकांड में श्रीफल की उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना गया है. विजय केसरी ने कहा कि नारियल उत्पादन में विश्व में भारत का दूसरा स्थान है. देश में करीब 16 लाख एकड़ में नारियल उपजाया जाता है. पर्यावरण और धार्मिक दृष्टि से नारियल के पेड़ लाभदायक हैं. झारखंड सरकार को भी इस दिशा में पहल करने की जरूरत है. चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजकुमार जैन टोंग्या ने कहा कि नारियल एक फल ही नहीं, बल्कि विभिन्न औषधीय गुणों से भरपूर है. पोषण की दृष्टि से नारियल एक लाभकारी फल है. व्यवसायी सह समाजसेवी अरुण जैन लुहाड़िया ने कहा कि नारियल कई औषधीय गुणों से भरपूर है. गोष्ठी में दीपक प्रसाद मेहता, राहुल मेहता, मनोज प्रसाद, पुष्पा कुमारी, पुष्प लता, अरुण गुप्ता, प्रकाश राम, विनोद केसरी प्रदीप प्रसाद सहित काफी संख्या में लोग शामिल हुए.

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