हजारीबाग : खराब परीक्षा परिणाम पर डीईओ का एक्शन, शिक्षकों से मांगा गया स्पष्टीकरण

Hazaribagh News: हजारीबाग में वार्षिक मैट्रिक परीक्षा परिणाम खराब होने पर डीसी के निर्देश के बाद डीईओ ने 59 स्कूलों के 400 से अधिक शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा और मई वेतन रोक दिया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh News: झारखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय मुख्यालय जिला हजारीबाग का वार्षिक मैट्रिक परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं होने पर डीसी के संज्ञान लेने के बाद डीईओ ने 59 सरकारी विद्यालयों पर एक्शन लिया है. इसमें सभी 16 प्रखंड जैसे सदर, दारू, टाटीझरिया, इचाक, विष्णुगढ़, पदमा, बरही, बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग, कटकमसांडी, बरकट्ठा, चलकुसा, डाडी, चौपारण एवं चुरचू में उत्क्रमित उवि, उवि, और प्ल्स टू के 400 से अधिक शिक्षकों को स्पष्टीकरण पूछा गया है. इस संबंध में डीईओ कार्यालय की ओर से 13 मई को जारी पत्र में एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों से स्पष्टीकरण का जवाब मांगा गया है. स्पष्टीकरण के साथ ही डीईओ प्रवीन रंजन ने शिक्षकों के मई महीने का वेतन स्थगित कर दिया है. इससे कुछ शिक्षक संगठन भड़क गए है. झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ ने शनिवार यानी 16 मई को जिला स्तर पर अपने संगठन की आपात बैठक कर एकजूटता का परिचय दिया है.

क्या है मामला ? 

झारखंड अधिविध परिषद (जैक) की वार्षिक मैट्रिक परीक्षा में हजारीबाग का इस वर्ष 2026 में राज्य स्तर पर 14वां स्थान है. 2025 में हजारीबाग सातवें स्थान पर था. डीईओ ने जारी पत्र में कहा है कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित रूप से विद्यार्थियों की टेस्ट परीक्षा और उपलब्ध संसाधन के बावजूद परीक्षाफल की समीक्षा में पता चलता है कि शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं है. इससे पहले डीसी हेमंत सती जिला स्तर पर शिक्षा विभाग की समीक्षा किया. इसमें उम्मीद के अनुसार हजारीबाग का बेहतर परीक्षा परिणाम नहीं होने पर शिक्षा पदाधिकारी को कई आवश्यक दिशा निर्देश दिया. पहले डीसी ने लिया संज्ञान फिर डीईओ के एक्शन बाद बाद शिक्षकों पर हुई कार्रवाई से कुछ शिक्षक संगठन आहत है. 

शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में लगाना ठीक नहीं : रविंद्र चौधरी 

झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी महासचिव रविन्द्र चौधरी ने कहा कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है. उन्होंने कहा 2026 में जब मैट्रिक की टेस्ट परीक्षा पिक आवर में था तब कई शिक्षकों को विद्यार्थियों के आय, जाति और आवासीय जैसे कागजात बनाने के कार्य में लगा दिया गया. रविंद्र चौधरी कह रहे हैं कि शिक्षकों को एक, दो, तीन और चार नहीं बल्कि अलग-अलग 25 से अधिक गैर-शैक्षणिक कार्यों में नियमित रूप से लगाया जा रहा है. उन्होंने कहा यह जिला स्तर की बात नहीं है. शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना राज्य स्तर की बात हो गई है. इस पर सरकार को गंभीरता पूर्वक विचार करने की आवश्यकता है. हम सभी शिक्षक कड़ी मेहनत कर विद्यार्थियों को शिक्षित कर रहे हैं. ऐसे में हमारी हौसला अफजाई (बढ़ाने) के बजाय कार्रवाई हो रही है. शिक्षकों पर कार्रवाई बंद होनी चाहिए. हम सभी शिक्षक बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए और इसके आगे कड़ी मेहनत करने को तैयार हैं. इस तरह कार्रवाई कर हम सभी शिक्षकों को एकजुटता का परिचय देने पर शिक्षा विभाग ने मजबूर किया है.

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Published by: Priya Gupta

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