मौसम में बदलाव का मधुमक्खी पालन पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

हजारीबाग जिले में मधुमक्खी पालन कर महिलाएं आत्मनिर्भर हो रहीं हैं, लेकिन बदले मौसम की वजह से मधुमक्खी पालकों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

हजारीबाग. हजारीबाग जिले में मधुमक्खी पालन कर महिलाएं आत्मनिर्भर हो रहीं हैं, लेकिन बदले मौसम की वजह से मधुमक्खी पालकों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. जिले के तीन प्रखंडों (बड़कागांव, दारू और कटकमदाग) में मधुमक्खी पालन का कार्य चल रहा है. मधुमक्खी पालन के लिए जेएसएलपीएस ने महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण व अन्य जरूरी संसाधन मुहैया कराये हैं. इस कार्य में जिले की 17 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. ये महिलाएं कृषि कार्य के अलावा मधुमक्खी पालन में भी सक्रिय हैं. महिलाओं ने कहा कि मधुमक्खी पालन अतिरिक्त आय का अच्छा साधन है. दारू बासोबार की संगीता कुमारी ने बताया कि पिछले माह 20 मधुमक्खी बॉक्स से करीब दो हजार रुपये की आमदनी हुई थी, लेकिन हाल ही में हुई ओलावृष्टि से मधुमक्खी के डिब्बों को नुकसान पहुंचा है. हरली गांव में मधुमक्खी पालन कर रही आशा कुमारी ने बताया कि इससे यहां की महिलाओं की आमदनी बढ़ी है, हालांकि गर्मी में शहद का उत्पादन थोड़ा कम हो रहा है. बड़कागांव की रूक्मणि देवी ने कहा कि गर्मी के कारण मधुमक्खियों की संख्या में कमी आयी है. विनोबा भावे विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के प्रो केके गुप्ता ने कहा कि मधुमक्खियों के स्वास्थ्य और संरक्षण की आवश्यकता है. मधुमक्खियां किसानों की मित्र हैं, क्योंकि 70 प्रतिशत फसल परागण इन्हीं के द्वारा किया जाता है, जिससे किसानों की पैदावार बढ़ती है. पिछले कुछ दिनों से इस सामाजिक कीट और मानव के बीच द्वंद्व चल रहा है. शहद उत्पादन के लिए मधुमक्खी के छत्ते का तापमान 35 डिग्री सेंटीग्रेट से अधिक नहीं होना चाहिए. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से हजारीबाग का तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है, जिससे मधु का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. फसल में कीटनाशक दवाओं के उपयोग का मधुमक्खियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

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Published by: Praveen

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