मेरू कैंप में तैयार हो रही हैं BSF की 44 महिला कमांडो, रात 1 बजे से 17 किलो वजन के साथ लगाती हैं 16 किमी दौड़

जयनारायण रांची : सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की महिला कमांडो देश की सुरक्षा को लेकर सीमा से लेकर राज्यों तक में बहादुरी के साथ डटी हुई हैं. दुश्मनों की हर साजिश को नाकाम करना और देश का सिर ऊंचा उठाये रखने की जिम्मेवारी इनके कंधों पर है. हर परिस्थिति से लड़ने के लिए इन्हें कठिन […]

जयनारायण
रांची : सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की महिला कमांडो देश की सुरक्षा को लेकर सीमा से लेकर राज्यों तक में बहादुरी के साथ डटी हुई हैं. दुश्मनों की हर साजिश को नाकाम करना और देश का सिर ऊंचा उठाये रखने की जिम्मेवारी इनके कंधों पर है. हर परिस्थिति से लड़ने के लिए इन्हें कठिन ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाता है, ताकि हर चुनौतियों का सामना करने के लिए महिला कमांडो हमेशा तैयार रहे. इस वक्त बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र, मेरू में देश भर की 44 महिला कमांडो खास प्रशिक्षण ले रही हैं. आठ सप्ताह के प्रशिक्षण के बाद ये ब्लैक कैट कमांडो देश की सीमा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा में तैनात हो जायेंगी.
7.30 मिनट में पार करती हैं 18 बाधाएं
सीनियर कमांडेंट एसएस श्रीवास्तव ने बताया कि इनके चयन से पहले दो सप्ताह का प्राथमिक कोर्स कराया जाता है. इसमें सफल होने के बाद कमांडो प्रशिक्षण मिलता है़ कमांडो बनने के लिए आठ सप्ताह तक कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है. प्रतिदिन रात को एक बजे से प्रशिक्षण शुरू होता है.
रोजाना 16 किमी तक 17 किलो वजन के साथ दौड़ाया जाता है. 800 मीटर में 18 बाधाओं को पार करने के लिए 7.30 मिनट का समय दिया जाता है. सीनियर प्रशिक्षक सह कमांडेंट अजय कुमार दहिया ने बताया कि नेविगेशन के तहत कमांडो को काफी ऊंचाई से बिल्कुल अनजान जगह पर उतारा जाता है. ऑपरेशन इलाके को सर्च कर टास्क पूरा करती हैं.
झारखंड की एक, बिहार की तीन कमांडो भी
17 राज्यों से चयन होकर बीएसएफ की महिला फौजी यहां ट्रेनिंग ले रही हैं. इनमें झारखंड की भी एक महिला जवान है. इसके अलावा छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, आंध्रप्रदेश, केरल की एक-एक, पंजाब और महाराष्ट्र की छह-छह, बिहार, राजस्थान, और मध्यप्रदेश से तीन-तीन, उत्तरप्रदेश की पांच, ओड़िशा की चार, गुजरात की दो और पश्चिम बंगाल की चार महिला फौजी शामिल हैं.
लड़ाकू व्यक्तित्व ही पहचान
कमांडो प्रशिक्षण के डीआइजी सुल्तान अहमद ने बताया कि महिला कमांडो का मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ्य होना अति आवश्यक है. इन्हें इस रूप में तैयार किया जाता है कि चंद सेकेंड में ही दुश्मनों पर टूट पड़े. दुश्मन बचकर न निकल पाये. इनका हौसला और लड़ाकू व्यक्तित्व ही अहम हथियार होता है.
कहीं भी दुश्मनों को चुनौती देने के लिए तैयार
उत्तर प्रदेश से ट्रेनिंग लेने आयी कमांडो अंशु ने बताया कि वह तीन वर्ष पहले बीएसएफ से जुड़ी. कमांडो ट्रेनिंग से आत्मविश्वास बढ़ा है. पंजाब से आयी ममता रानी ने कहा कि कमांडो ट्रेनिंग में दूसरों की मदद करने के काबिल बनाया जाता है. गुजरात की प्रभा रेखा, बिहार की अलका शरण ने कहा कि पहले स्कूल तक छोड़ने परिवार के सदस्य आते थे. अब वह कहीं भी शत्रु को चुनौती देने के लिए तैयार हैं.
इच्छुक महिला जवानों को ही ट्रेनिंग
बीएसएफ के आइजी महेंद्र सिंह ने बताया कि बीएसएफ में महिला फौज में भर्ती के लिए एसएससी परीक्षा में शामिल होना पड़ता है. इसमें चयन के बाद शारीरिक जांच परीक्षा होती है. यह चयन परीक्षा बीएसएफ समय समय पर लेती है. इसके बाद इच्छुक महिला को ट्रेनिंग दी जाती है.

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