चुनाव में 10 किमी पैदल चलकर देते हैं वोट, सुविधा मांगने पर भी नहीं पहुंची सड़क

गुमला जिले के कोदा गांव के करीब 250 लोग बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं. सड़क, बिजली, स्वच्छ पेयजल और शिक्षा की कमी ने जीवन दूभर कर दिया है. ग्रामीण अब आंदोलन और वोट बहिष्कार की चेतावनी दे रहे हैं.

जारी (गुमला). जारी प्रखंड की गोविंदपुर पंचायत का ऊपर कोदा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है. छत्तीसगढ़ सीमा से सटे पहाड़ की तलहटी में बसे गांव में करीब 40 परिवार के 250 लोग रहते हैं. ग्रामीण डिभरी के सहारे जीवन गुजार रहे हैं. गांव तक पक्की सड़क तो दूर, कच्चा रास्ता भी नहीं है. गर्मी में दोपहिया वाहन पहुंच जाते हैं, जबकि बारिश में करीब एक किलोमीटर पहले वाहन छोड़कर पैदल जाना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार बिजली के खंभे और तार लगे हैं, लेकिन नियमित आपूर्ति नहीं होती. मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है. पेयजल के लिए चापाकल नहीं होने से कुएं का दूषित पानी पीना पड़ता है. गांव में केवल आंगनबाड़ी केंद्र है. उत्क्रमित मध्य विद्यालय को मर्ज कर दिये जाने के बाद बच्चों को नीच कोदा जाना पड़ता है. उच्च शिक्षा के लिए भिखमपुर करीब 10 और जारी 15 किलोमीटर दूर है. दुर्गम रास्ते के कारण कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर महानगरों में पलायन कर जाते हैं.

ग्रामीणों ने बतायी परेशानी

ग्रामीण ध्रुवराम ने बताया कि बच्चों, खासकर छात्राओं को रोजाना 10 से 15 किलोमीटर पहाड़ी रास्ते से आना-जाना पड़ता है. इससे अभिभावकों को हमेशा अनहोनी की चिंता बनी रहती है. धनजीवन उरांव ने कहा कि खंभे और तार लगाए जाने के बावजूद बिजली का लाभ नहीं मिल रहा है. रिझू नगेसिया ने कहा कि चुनाव के समय ग्रामीण 9-10 किलोमीटर पैदल चलकर मतदान करने जाते हैं, लेकिन आज तक गांव की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ.

रमेश्वर नगेसिया ने कहा कि सड़क नहीं होने से बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी होती है. लोयला टोप्पो ने कहा कि सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण गांव की बेटियों के लिए अच्छे रिश्ते भी नहीं आते. प्रतिमा तिर्की ने बताया कि चापाकल नहीं होने से दूषित कुएं का पानी पीना मजबूरी है. शंकर टोप्पो ने विद्यालय को पुनः खोलने की मांग की, ताकि गांव के बच्चों को कम से कम मध्य स्तर तक की शिक्षा गांव में ही मिल सके.

ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी

ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन से सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र पहल नहीं हुई तो आंदोलन किया जायेगा और आगामी पंचायत चुनाव में वोट बहिष्कार का निर्णय लिया जा सकता है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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