गुमला. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग, भारत सरकार की देखरेख और संरक्षण में जरूरतमंद बच्चों का सर्वेक्षण कर कार्य योजना तैयार की जायेगी. इसके लिए देश के पांच जिलों का चयन किया गया है, जिसमें झारखंड का गुमला जिला भी शामिल है. यह सर्वेक्षण सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान, रांची तथा झारखंड सरकार के निर्देशन में जिला प्रशासन, गुमला द्वारा कराया जायेगा. सर्वेक्षण में अनाथ, ट्रैफिकिंग से पीड़ित, बाल श्रमिक, स्कूल ड्रॉपआउट, बाल विवाह से प्रभावित व कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों को शामिल किया जायेगा. इस संबंध में प्रारंभिक बैठक परिसदन सभागार, गुमला में आयोजित की गयी. बैठक में केंद्र सरकार के सामाजिक बाल संरक्षण परामर्शी प्रशांत हरलालका एवं बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य संजय मिश्र मौजूद रहे. बैठक के दौरान किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य त्रिभुवन शर्मा ने विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों की स्थिति की जानकारी दी. वहीं बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नेमहनती कुमारी एवं कृपा खेस ने ट्रैफिकिंग से पीड़ित बच्चियों के पुनर्वास के लिए संस्थागत सुविधा के अभाव की ओर ध्यान आकृष्ट कराया. जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी अमर कुमार ने स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर व आफ्टर केयर कार्यक्रमों की जानकारी साझा की. विधि सह परिवीक्षा पदाधिकारी रवि प्रकाश ने किशोर न्याय बोर्ड की नवाचार पहल परिवार परामर्श केंद्र के बारे में बताते हुए कहा कि बच्चों के साथ-साथ परिवार को भी सशक्त करना आवश्यक है. चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक ने अपनी कार्यप्रणाली से अवगत कराया. बैठक में स्वयंसेवी संस्था ग्राम स्वराज संस्थान, लोहरदगा एवं सिन्नी के प्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों के हित में ग्रास रूट लेवल पर प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है. बैठक में गुमला जिले में बच्चों की स्थिति और उनकी समस्याओं पर चर्चा हुई. बताया गया कि सर्वेक्षण जिले के सभी गांवों और टोलों में घर-घर जाकर किया जायेगा. इसका उद्देश्य देश में बच्चों से जुड़ी समस्याओं का आकलन कर समाधान तैयार करना है. यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में देशव्यापी कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने में सहायक होगा.
जरूरतमंद बच्चों का होगा घर-घर सर्वे, केंद्र सरकार का पायलट प्रोजेक्ट शुरू
जरूरतमंद बच्चों का होगा घर-घर सर्वे, केंद्र सरकार का पायलट प्रोजेक्ट शुरू
