अंधविश्वास या अव्यवस्था? झाड़-फूंक के बीच 8 दिन से बीमार दो मासूम भाइयों की मौत

गुमला के पालकोट में इलाज के अभाव और अंधविश्वास के कारण दो मासूम सगे भाइयों की मौत हो गई। परिजन अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा ले रहे थे।

गुमलाः पालकोट प्रखंड के मतिमटोली डोंगाड़ाड गांव में शुक्रवार को एक मार्मिक घटना सामने आयी. यहां आठ दिनों से बीमार दो मासूम भाइयों की करीब एक घंटे के अंतराल में मौत हो गई. मृतकों की पहचान फ्रांसिस उरांव के पुत्र सचिन उरांव (4 वर्ष) और अनुज उरांव (3 वर्ष) के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार सचिन की मौत सुबह करीब आठ बजे, जबकि अनुज ने करीब नौ बजे दम तोड़ दिया.

आठ दिनों से बीमार थे दोनों बच्चे

बताया गया कि दोनों बच्चे पिछले आठ दिनों से बीमार थे. परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में ही एक ग्रामीण चिकित्सक से इलाज करा रहे थे. बीमारी ठीक होने की उम्मीद में झाड़-फूंक भी करायी गई. शुक्रवार की सुबह अचानक दोनों बच्चों की तबीयत बिगड़ गई. करीब एक घंटे के अंतराल में दोनों की मौत हो गई.

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स्वास्थ्य सुविधा को लेकर उठ रहे सवाल

पालकोट प्रखंड के प्रतिनिधि महिपाल सिंह ने बताया कि मतिमटोली सांसद आदर्श ग्राम है. इसके बावजूद गांव में स्वास्थ्य सुविधा का अभाव है. उनका कहना है कि गांव में न तो स्वास्थ्य केंद्र है और न ही नियमित रूप से नर्स या चिकित्सक पहुंचते हैं. गांव की दूरी पालकोट से करीब छह किलोमीटर है.

हालांकि, इस घटना में यह सवाल भी उठ रहा है कि पालकोट अस्पताल की दूरी कम होने के बावजूद बीमार बच्चों को समय रहते अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया. परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, उन्हें विश्वास था कि बच्चे गांव में ही इलाज और झाड़-फूंक से ठीक हो जाएंगे.

उनका कहना था कि पहले भी बीमारी के दौरान बच्चे खुद ठीक हो चुके थे. इसी विश्वास के कारण इस बार भी दोनों बच्चों को अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में ही इलाज और झाड़-फूंक कराई जाती रही. दोनों मासूमों की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है. घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता के साथ-साथ समय पर चिकित्सा सुविधा लेने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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