युवा दिवस पर विशेष : तीन बार रिजेक्शन, फिर हार को ताकत बना लिया नेल्सन भगत ने

झारखंड के गुमला शहर से निकलकर एक आदिवासी परिवार का बेटा आज हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है.

खुद फौजी नहीं बन पाये, तो युवाओं को फौजी बनने की दे रहे ट्रेनिंग दो दर्जन से अधिक युवा सेना में चयन हुए हैं. अग्निवीर में भी चयन हुआ है. जगरनाथ पासवान, गुमला झारखंड के गुमला शहर से निकलकर एक आदिवासी परिवार का बेटा आज हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है. नाम है नेल्सन भगत. एक ऐसा नाम जिसने हार को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. नेल्सन भगत बचपन से ही खेलकूद में बेहद प्रतिभाशाली रहे. राष्ट्रीय स्तर के खेलों में उन्होंने अपने राज्य झारखंड का नाम रोशन किया. लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना था भारत का फौजी बनना. इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से प्रयास किया. लेकिन किस्मत ने तीन बार मेडिकल में उन्हें रिजेक्ट कर दिया. तीन बार रिजेक्ट होने के बाद जहां अक्सर लोग टूट जाते हैं. वहीं नेल्सन भगत ने हार मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने ठान लिया. अगर मैं खुद फौजी नहीं बन सका, तो हजारों युवाओं को फौजी बनाऊंगा. इसी संकल्प के साथ 21 दिसंबर 2021 को गुमला में लक्ष्य फिजिकल एकेडमी का उदघाटन किया गया. उसी दिन से यह संस्था सिर्फ एक एकेडमी नहीं, बल्कि देशभक्ति, अनुशासन और संघर्ष की पाठशाला बन गयी. आज इस एकेडमी से निकलकर हजारों युवा भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा सेवाओं में देश की सेवा कर रहे हैं. नेल्सन भगत सिर्फ एक प्रशिक्षक ही नहीं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं. वे धर्म और जाति से ऊपर उठकर जरूरतमंदों की मदद करते हैं और युवाओं को सही दिशा दिखाने का काम कर रहे हैं. युवा दिवस के अवसर पर नेल्सन भगत की कहानी हर उस युवा को संदेश देती है. सपने टूट सकते हैं. लेकिन हौसले नहीं. अगर इरादे मजबूत हों, तो एक व्यक्ति भी हजारों ज़िंदगियों की दिशा बदल सकता है. नेल्सन भगत ने कहा कि अकेडमी में प्रशिक्षण लेने के बाद आज दो दर्जन से अधिक युवा सेना में चयन हुए हैं. अग्निवीर में भी चयन हुआ है. खुशी होती है कि आज हमारे एकेडमी के युवा देश की सेवा में लगे हुए हैं.

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Author: VIKASH NATH

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