गुमला. गुमला के पुग्गू गांव में सरहुल पर्व मनाया गया. मौके पर पहान, पुजार, महतो, कोटवार, पुजार सुसार द्वारा चाला मां, धर्म बाबा से पूजा कर सबके लिए सुख शांति, समृद्धि की प्रार्थना की गयी. साथ ही अच्छी बारिश होने, जीवन खुशहाल हो, हम सब सुख शांति से रहें आदि कामना की गयी. आयोजन समिति के संरक्षक बुदू टोप्पो ने कहा कि सरहुल त्योहार सूरज और धरती का विवाह के रूप में मनाया जाता है. मंच संचालन करते हुए डॉ तेतरू उरांव ने कहा कि यह त्योहार हमें मिल-जुल कर रहने का संदेश देता है. छोटया उरांव ने कहा कि यह पर्व आपसी भाईचारे मेल प्रेम का संदेश देती है. शिवनंदन उरांव ने कहा कि सरहुल त्योहार जिसे कुड़ुख भाषा में खद्दी कहते हैं, जिसे हम जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. मौके पर नृत्य कर खुशहाली मानते हैं. इस अवसर पर पंसस सुनीता उरांव ने भी सभा को संबोधित करते हुए आशीर्वचन प्रदान किया. धन्यवाद व समापन आशीर्वचन श्री बिरसाई उरांव ने किया. पुग्गू के कई नृत्य समूह शामिल हुए और अपना नृत्य प्रस्तुत किये, जिन्हें झंडा देकर सम्मानित किया गया. मौके पर गुमला से दिल्ली, साइकिल यात्रा कर जाने वाली कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला की दिव्या कुजूर को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में तेजपाल उरांव, सुकरू उरांव, छोटू उरांव, दीपक भगत, विनोद उरांव, विनोद मिंज, बुधराम उरांव, बुधवा उरांव, मैनेजर भगत, लालू उरांव, धेमु उरांव, राजकुमार उरांव, बरसाई उरांव आदि शामिल हुए.
हमें मिल-जुल कर रहने का संदेश देता है सरहुल
पुग्गू गांव में सरहुल पर्व मनाया गया
