20 साल बाद स्कूल में फिर जुटे पुराने यार, यादों और ठहाकों से गुलजार हुआ संत इग्नासियुस

गुमला के संत इग्नासियुस हाई स्कूल में 2005 बैच का मिलन समारोह आयोजित हुआ. स्कूल के एचएम ने बताया कि 2034 में विद्यालय अपनी स्थापना के 100 साल पूरे करेगा.

गुमलाः संत इग्नासियुस हाई स्कूल, गुमला में शिक्षक दिवस के अवसर पर वर्ष 2005 बैच के पूर्व छात्रों का मिलन समारोह उत्साह और भावुकता के बीच आयोजित हुआ. लंबे समय बाद स्कूल परिसर में एक-दूसरे से मिले पुराने साथियों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आयी. किसी ने शिक्षकों के अनुशासन को याद किया, तो किसी ने स्कूल के दिनों की शरारतों और पुरानी घटनाओं का जिक्र किया. यादों का सिलसिला चला, तो शिक्षक और पूर्व छात्र कई बार खिलखिलाकर हंस पड़े.

समाज के लिए बेहतर काम करें पूर्व छात्र : रेक्टर

कार्यक्रम में संत इग्नासियुस स्कूल के रेक्टर फादर फ्लोरेंस कुजूर ने पूर्व छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी छात्र आज जीवन में जिस मुकाम पर हैं, वहां से समाज के लिए बेहतर काम करने का प्रयास करें. उन्होंने पूर्व छात्रों से समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करने और सकारात्मक बदलाव में योगदान देने की अपील की.

स्कूल के एचएम फादर मनोहर खोया ने बताया कि संत इग्नासियुस स्कूल की स्थापना वर्ष 1934 में हुई थी. विद्यालय अब धीरे-धीरे अपने 100 वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रहा है. वर्ष 2034 में विद्यालय के शताब्दी वर्ष पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा. उन्होंने पूर्ववर्ती छात्रों से इसकी तैयारी में सहयोग करने की अपील की. साथ ही समय-समय पर स्कूल में रक्तदान शिविर आयोजित करने और उसमें पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया.

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शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी: अजीता लकड़ा

पूर्व शिक्षिका अजीता लकड़ा ने शिक्षा और संस्कार के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को झुकने नहीं देगी और संस्कार उसे गिरने नहीं देंगे. उन्होंने सभी से अपने बच्चों और आसपास के लोगों को शिक्षा और संस्कार देने का प्रयास करने की अपील की. पूर्व शिक्षक आंद्रियस कुजूर ने कहा कि समाज में जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए. उन्होंने सभी से किसी को परेशान नहीं करने और अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों की सहायता करने की अपील की.

स्कूल से जुड़ा विश्वास का रिश्ता मजबूत करने पर जोर

शिक्षिका अर्चना कुमारी ने विद्यालय से जुड़े अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2004 में इस स्कूल से जुड़ी थीं. उन्होंने कहा कि स्कूल से जुड़े लोगों के बीच विश्वास का रिश्ता बना हुआ है, जिसे लगातार मजबूत करने की जरूरत है. इग्नासियुस एलुमनी के अध्यक्ष कुमार सुंदरम भारद्वाज ने कहा कि जब भी वह इस विद्यालय में आते हैं, उनका रोम-रोम पुलकित हो उठता है. विद्यालय की यह भूमि उनके लिए कर्म और पुण्य की भूमि है. उन्होंने सभी से समाज में जितना संभव हो सके, दूसरों की मदद करने का प्रयास करने की अपील की.

गांवों के विकास और भ्रष्टाचार खत्म करने की अपील

पूर्व शिक्षक एलविस टोप्पो ने स्कूल की पुरानी यादों को ताजा किया और विद्यालय में हुए कार्यों तथा अब तक की प्रगति की जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि वर्ष 1954 में गुमला एक छोटा स्थान था, जो आज काफी विकसित हो चुका है. हालांकि शहर की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी विकास की जरूरत है. उन्होंने पूर्व छात्रों से गांवों के विकास के लिए काम करने, भ्रष्टाचार को समाप्त करने और अपने मूल्यों के साथ जीवन जीने की अपील की.

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पुरानी यादों से भावुक और खुशनुमा बना माहौल

पूर्व छात्र मनोज कुमार सत्पथी ने दिवंगत शिक्षकों सनिया टोप्पो और नर्मदेश्वर पाठक को श्रद्धापूर्वक याद किया. छात्र सुमित कुमार सारंगी ने फादर फ्लोरेंस कुजूर से जुड़ी कोयनारा गांव में चेकडैम निर्माण और उसके उद्घाटन की पुरानी स्मृतियां साझा कीं. आरिफ आलम ने स्कूल के छोटे-बड़े बालों से जुड़ी पुरानी कहानी सुनाकर सभी को खूब हंसाया, वहीं स्टेफन रोशन कुजूर ने स्कूल से भागने के दिनों की यादें साझा कीं. कार्यक्रम का संचालन विनीत नंद ने किया.

कार्यक्रम में मौजूद रहे कई लोग

मौके पर एलविस टोप्पो, संजय शर्मा, शांति मारग्रेट बड़ा, ललकारियुस मिंज, अशोक राम, रामचंद्र साहू, सनिराम पासवान, गौरव कुमार, विकास कुमार सिंह, अमित सिंह, मनोज कुमार, मो शाहिद खान, अमित कुमार, अभिषेक, विपीन एक्का, निर्मल टोप्पो, संतोष, सुजीत कुमार, सुरेश, आरिफ आलम, मो आसिफ, चंदन कुमार, रवि निरंजन, रवि महतो, साकेत कुमार झा, रंजीत कुमार उरांव, दीपक कुमार भगत, नवनीत कुमार, संजय उरांव, विनीत कुमार नंद, नीरज कुमार गुप्ता, सुमित कुमार सरांगी, कुंदन कुमार, जोनी कुजूर, स्टेफन रोशन कुजूर, मो महताब आलम, राजेश कुजूर, मो हुसैन सहित कई पूर्व छात्र एवं शिक्षक मौजूद थे.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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