24 जिलों के चयनित गांवों में तीन लाख पेड़ों में रक्षा सूत्र बांधना है : पीसीसीएफ

झारखंड वन विभाग ने पेड़ों को बचाने के लिए रक्षा सूत्र अभियान शुरू किया है। इसके तहत राज्य के 24 जिलों में तीन लाख पेड़ों पर राखी बांधकर संरक्षण का संकल्प लिया जाएगा.

गुमला. वन विभाग गुमला ने शुक्रवार को जोराग, आंजन और तर्री गांव में रक्षा सूत्र कार्यक्रम आयोजित किया. इस दौरान पेड़ों को राखी बांधकर जंगल और पेड़ों को बचाने का संकल्प लिया गया. जैविक पार्क में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी बेलाल अहमद सहित कई लोग शामिल हुए.

पीसीसीएफ संजीव कुमार ने जोराग गांव में एक पेड़ को राखी बांधकर अभियान की शुरुआत की. उन्होंने बताया कि यह पहल पेड़ बचाओ अभियान का हिस्सा है, जो एक महीने तक चलेगा. अभियान के तहत झारखंड के 24 जिलों के चयनित गांवों में तीन लाख पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधने का लक्ष्य रखा गया है.

उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन 700 गांवों में एक लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य है. इसके बाद यह अभियान पूरे एक महीने तक चलेगा और 24 जिलों में तीन लाख पेड़ों को राखी बांधी जायेगी.

2004 में शुरू हुई थी पहल

संजीव कुमार ने बताया कि पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधने की पहल वर्ष 2004 में धनबाद जिले के टुंडी ब्लॉक के लुकाइया गांव से शुरू हुई थी. उस समय यह क्षेत्र भाकपा माओवादी प्रभावित था. इसके बाद राज्य के 12,000 से अधिक गांवों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जा चुका है.

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहनों के रिश्ते और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का त्योहार है. इसी तरह पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि हमारा जीवन प्रकृति पर निर्भर है.

वन समिति के अध्यक्ष चंदमोहन उरांव ने बताया कि ग्रामीण पिछले 10 वर्षों से पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर उनकी रक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जंगल से ऑक्सीजन मिलती है और वनोपज से ग्रामीणों को आर्थिक लाभ भी होता है.

दो दशक में 1128 वर्ग किमी बढ़ा वन क्षेत्र

संजीव कुमार ने बताया कि पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधने की पहल से झारखंड में वन क्षेत्र बढ़ाने में भी मदद मिली है. फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राज्य का वन क्षेत्र बढ़ा है. वर्ष 2001 के बाद पिछले दो दशकों में झारखंड का वन क्षेत्र 1,128 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है.

उन्होंने कहा कि इस अभियान से जल संरक्षण और वनों को फिर से विकसित करने में भी मदद मिली है.

पार्क के जरिये जंगल और औषधीय पौधों की जानकारी

संजीव कुमार ने कहा कि जंगलों में पार्क बनाने का उद्देश्य लोगों को वन और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है. जंगल में कई तरह की वनऔषधियां पायी जाती हैं, लेकिन बहुत से लोगों को इनके बारे में जानकारी नहीं होती. पार्क के माध्यम से लोगों को इन औषधीय पौधों की जानकारी मिल सकती है.

उन्होंने कहा कि पार्क में जंगली जानवरों के बारे में भी जानकारी दी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को जंगल और पर्यावरण बचाने के प्रति जागरूक करना है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >