सिसई. सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन सिसई प्रखंड की भुरसो पंचायत के बेरीटोली और पानीलता गांव के ग्रामीण आज भी बदहाल सड़क से परेशान हैं. ग्रामीणों के अनुसार, आजादी के 80 साल बाद भी उन्हें पक्की सड़क तो दूर, चलने लायक बेहतर कच्चा रास्ता भी नहीं मिला है. बारिश शुरू होते ही मुख्य रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल गया है.
यह रास्ता भुरसो पंचायत भवन के पास से जेएमएम के केंद्रीय सदस्य स्तर के नेता शशिकांत साहू के घर होते हुए बेरीटोली-पानीलता के पास मुख्य सड़क से जुड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन महीने से उन्हें इसी कीचड़ भरे रास्ते से आना-जाना पड़ रहा है.
ग्रामीणों के अनुसार, गर्मी में तालाब निर्माण के दौरान निकली मिट्टी सड़क को ठीक करने के नाम पर रास्ते पर डाल दी गयी थी. बारिश के बाद यही मिट्टी कीचड़ और दलदल में बदल गयी. सड़क पर कीचड़ और पानी जमा होने से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है.
बच्चों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है. वहीं, किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल ले जाना भी चुनौती बन गया है.
समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने करीब एक माह पहले इसी कीचड़ भरे रास्ते में धान रोपकर विरोध जताया था. इसके जरिये स्थानीय नेताओं और सांसद का ध्यान भी समस्या की ओर दिलाने की कोशिश की गयी, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई.
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई बड़े स्थानीय नेता रहते हैं, इसके बावजूद सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने प्रशासन से जल्द सड़क की मरम्मत कराने और आवागमन को सुगम बनाने की मांग की है.
