पंसस ने स्वीकारा : बच्ची से रेप के मामले को गांव में ही दबाने के लिए एक लाख में समझौता हुआ था

गुमला के पलमा गांव में बच्ची से रेप के मामले को पंचायत में एक लाख रुपये लेकर दबाने की कोशिश का खुलासा हुआ है। प्रशासन ने जांच टीम गठित की है।

दुर्जय पासवान, गुमला घाघरा प्रखंड में पलमा गांव है. इस गांव में बच्ची से रेप के बाद रविवार को पंचायत लगाकर मामला सलटाने का प्रयास अब हाईलेबल हो गया है. प्रभात खबर में समाचार छपने के बाद गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो के निर्देश पर एक जांच टीम का गठन किया गया है. जांच टीम 14 जुलाई को गांव जायेगी. सीडब्ल्यूसी ने भी संज्ञान में लिया है. पीड़िता की मां से सीडब्ल्यूसी ने पूछताछ किया है. वहीं, दूसरी तरफ आंगी के पंचायत समिति सदस्य जितेंद्र उरांव ने प्रभात खबर को फोन कर गांव में घटी घटना पर अपना पक्ष रखा है. पंसस श्री उरांव ने स्वीकार किया है कि बच्ची से दुष्कर्म के बाद गांव में पंचायत लगायी गयी. जिसमें आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था.

जुर्माना की रकम पीड़ित बच्ची के माता पिता को मिलता. उन्होंने उस बात का खंडन किया है. जिसमें आरोपी द्वारा 20 हजार रुपये लेकर गांव में पार्टी मनाया गया है. पंसस ने कहा है कि बैठक के बाद आरोपी ने 20 हजार रुपये नहीं दिया है. न ही किसी प्रकार की पार्टी मनायी गयी है. सिर्फ जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना की रकम वह बाद में देने पर सहमति दिया था. उन्होंने यह भी बताया कि मेरे से बस यह गलती हुई कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी मैं बैठक में शामिल हुआ और इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी. इस प्रकार की घटना से गांव बदनाम होता. इसलिए पंचायत लगाकर गांव में ही मामला को सलटाने का प्रयास किया गया था.

आरोपी को मारकर दफनाने की योजना थी

यहां बता दें कि बच्ची से रेप के बाद पलमा गांव में पंचायत हुई. जिसमें सबसे पहले बात रखी गयी कि आरोपी ने अपराध किया है. उसकी हत्या कर उसके शव को दफनाने पर चर्चा हुई. लेकिन कुछ लोगों ने कहा कि मारने से अच्छा है. इसे पुलिस को सौंप दिया जाये. ताकि कानून उसे सजा देगी. काफी विचार विमर्श और सभी लोगों के राय लेने के बाद यह तय हुआ कि हत्या करने व जेल भेजने से अच्छा है. गांव को बदनामी से बचाने के लिए आरोपी पर जुर्माना लगाया जाये. शुरू में पांच लाख रुपये का जुर्माना ठोका गया. परंतु, आरोपी ने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए कहा कि वह इतना पैसा नहीं दे सकता. अंत में सभी ने तय किया कि एक लाख रुपये का जुर्माना ठीक है. इसके बाद आरोपी ने पंचायत में कहा था कि एक सप्ताह के अंदर वह एक लाख रुपये जुगाड़ कर दे देगा.

पार्टी करने के मामले को दबाने का प्रयास

बताया जा रहा है कि बैठक के बाद आरोपी ने पार्टी दिया था. जिसमें कई लोग शामिल हुए थे. परंतु, जब मामला उजागर होने के बाद हाईलेबल हुआ तो अब पंचायत के बाद पार्टी मनाने की बात को दबाने का प्रयास किया जा रहा है. आरोपी से पैसा लेकर पार्टी मनाने के मामले को दबाने के लिए पीड़िता के माता पिता को भी इस प्रकार का बयान नहीं देने के लिए गांव के कुछ दबंग लोगों ने कहा है. ऐसे, यह पूरा मामला बच्ची के रेप के बाद पंचायत लगाकर मामले को दबाने और आरोपी पर जुर्माना लगाने से जुड़ा हुआ है.


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By Durjay paswan

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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