पुल के इंतजार में गुजर गयीं पीढ़ियां, आज भी नदी पार कर पहुंचते हैं पहाड़ सुवाली

डुमरी के पहाड़ सुवाली गांव में पुल न होने से बरसात में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. प्रशासन से जल्द पुल निर्माण की मांग की गई है.

प्रेम प्रकाश भगत की रिपोर्ट

डुमरी (गुमला): डुमरी प्रखंड की करनी पंचायत अंतर्गत पहाड़ सुवाली गांव के ग्रामीण आज भी नदी पर पुल नहीं होने की समस्या झेल रहे हैं. गांव तक पहुंचने वाले मार्ग में नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों और पशुओं को नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है. खासकर बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है. ग्रामीणों को हर साल बारिश के मौसम में दुर्घटना और अनहोनी की आशंका के बीच आवागमन करना पड़ता है.

बरसात में घंटों करना पड़ता है पानी कम होने का इंतजार

ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने पर पहाड़ सुवाली गांव का संपर्क बाजार और प्रखंड मुख्यालय से लगभग कट जाता है. तेज बहाव के कारण नदी पार करना मुश्किल हो जाता है और ग्रामीणों को पानी का स्तर कम होने का घंटों इंतजार करना पड़ता है. इसका सबसे अधिक असर बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है. अचानक किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ने पर उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है. जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को भी नदी पार करने के लिए जोखिम उठाना पड़ता है.

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पुल के अभाव में गांव बन जाता है टापू

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में पुल के अभाव में पहाड़ सुवाली गांव किसी टापू की तरह हो जाता है. तेज बारिश के दौरान नदी का बहाव इतना बढ़ जाता है कि उसे पार करना बेहद खतरनाक हो जाता है. इसके बावजूद रोजमर्रा की जरूरतों और जरूरी कामों के लिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है.

सांसद को भी दिया गया था आवेदन

ग्रामीणों ने बताया कि नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर पूर्व में सांसद सुखदेव भगत को आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया गया था. इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से जनहित तथा ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नदी पर जल्द से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है.

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By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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