गुमला. पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से 46 झारखंड बटालियन एनसीसी गुमला ने ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अभियान के तहत पौधरोपण कार्यक्रम चलाया. एनसीसी ग्रुप हेडक्वार्टर रांची के तत्वावधान में चलाये गये अभियान के तहत चार शिक्षण संस्थानों के एनसीसी कैडेटों को 750 स्थानीय पौधे वितरित किये गये. खास बात यह है कि कैडेटों को पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी दी गयी है.
चार स्कूलों के कैडेटों को मिले पौधे
बटालियन की ओर से डीएवी पब्लिक स्कूल गुमला, डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गुमला, लूथेरान हाई स्कूल गुमला और सरस्वती विद्या मंदिर हाई स्कूल गुमला के एनसीसी कैडेटों को पौधे उपलब्ध कराये गये. कैडेट अपने संस्थानों के अलावा अपने घरों और स्थानीय समुदायों में भी पौधे लगायेंगे. इसके बाद पौधों की नियमित देखभाल और पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी कैडेटों की होगी.
पर्यावरण संरक्षण के दूत बनेंगे कैडेट
46 झारखंड बटालियन एनसीसी गुमला के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल पीबी शर्मा ने कहा कि अभियान का उद्देश्य एनसीसी कैडेटों को पर्यावरण संरक्षण का दूत बनने के लिए प्रेरित करना है. साथ ही आम लोगों को भी हरित और स्वस्थ वातावरण तैयार करने में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में एनसीसी कैडेटों और शिक्षण संस्थानों की अधिक भागीदारी के साथ पौधरोपण अभियान जारी रहेगा. बटालियन ने स्थानीय पौधे उपलब्ध कराने और अभियान को सफल बनाने में सहयोग के लिए डीएफओ गुमला का आभार जताया.
डीएवी स्कूल को मिले 190 पौधे
अभियान के तहत डीएवी पब्लिक स्कूल गुमला को विशेष रूप से 190 पौधे मिले. विद्यालय में कैडेटों ने उत्साह के साथ पौधरोपण किया. विद्यालय की प्रधानाचार्या माधवी पांडे ने एनसीसी के प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा कि अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाना और उनका संरक्षण करना विद्यार्थियों में नैतिक जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना विकसित करता है.
कैडेट और स्कूल स्टाफ भी करेंगे पौधों की देखभाल
एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर सेकेंड ऑफिसर अभिजीत झा ने अभियान की रूपरेखा बताते हुए कहा कि सभी कैडेटों को इसके लिए सक्रिय किया गया है, ताकि वितरित किये गये पौधों की उचित देखभाल सुनिश्चित हो सके और वे बड़े होकर पर्यावरण को शुद्ध करने में अपनी भूमिका निभा सकें. पौधों का वितरण कैडेटों के साथ विद्यालय के स्टाफ के बीच भी किया गया, ताकि अभियान में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो.
