दुर्जय पासवान, गुमला
गुमला नगर परिषद में सामग्री खरीद को लेकर उठे घोटाले के आरोपों ने शहर में हलचल मचा दी है. लाखों रुपये की खरीद में अनियमितताओं की चर्चा अब सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ रही है. नागरिकों ने उपायुक्त से पूरे मामले की जांच की मांग की है, लेकिन अब तक जांच टीम का गठन नहीं हुआ है. तीन दिन पहले सांसद सुखदेव भगत ने दिशा की बैठक में नगर परिषद के कार्यों पर सवाल उठाये थे, जिससे मामला और गरम हो गया.
किसी ने कहा-कमीशन का खेल चलता है, तो किसी ने कहा- पैसे के बिना काम नहीं होतासोशल मीडिया पर लोगों ने बेबाक राय रखी है. कई नागरिकों ने कहा कि नगर परिषद में कमीशन का खेल चलता है और बिना पैसे के कोई काम नहीं होता. स्ट्रीट लाइट और सोलर लाइट की उपयोगिता पर सवाल उठाए गए हैं. कुछ ने आरोप लगाया कि हाल ही में निकले 32 टेंडरों में पक्षपात हुआ है और विशेष लोगों को लाभ पहुंचाया गया है. पार्षदों और कार्यपालक पदाधिकारी के बीच हुई तीखी बहस पर भी लोगों ने नाराज़गी जतायी है.
निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जायेजनता की अपेक्षा है कि निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाये. कई लोगों ने जनप्रतिनिधियों को याद दिलाया कि उन्हें जनता ने चुना है, इसलिए जनता के हित में काम करना चाहिए. यदि वे कमीशन के पीछे भागेंगे तो जनता भविष्य में उन्हें मौका नहीं देगी. नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद भ्रष्टाचार का घर बन गया है और नीचे से ऊपर तक सभी लोग मस्त हैं, जबकि शहर की जनता त्रस्त है. गुमला के लोग अब नगर परिषद में हुई खरीद और कामों की जांच का इंतजार कर रहे हैं. उनका मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि एकजुट होकर आवाज उठायें तो भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है. जनता का विश्वास बनाये रखना ही प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
