गुमला नगर परिषद में काम कम, कमीशनखोरी के आरोप ज्यादा! शहर की बदहाली पर लोगों का फूटा गुस्सा

गुमला नगर परिषद में विकास कार्यों की जगह कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार चरम पर है. शहर की बदहाल सड़कों और नालियों को लेकर जनता में भारी आक्रोश है. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

गुमला. गुमला को लोग प्यार से फूलों का गमला भी कहते हैं. लेकिन शहर की मौजूदा स्थिति इसकी खूबसूरती पर सवाल खड़े कर रही है. कुछ प्रमुख मार्गों को छोड़ दें, तो शहर की कई गलियों और मुहल्लों की सड़कें व नालियां बदहाल हैं. कई जगहों पर नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है. नेशनल हाइवे की स्थिति भी कई स्थानों पर ठीक नहीं है.

सड़क पर बहता है नाली का गंदा पानी

शहर में नालियों की समस्या गंभीर बनी हुई है. कई जगह नाली की व्यवस्था नहीं होने या उसके ठीक से काम नहीं करने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है. सिसई रोड में बिजली का पोल भी मुख्य मार्ग पर गिराकर छोड़ दिया गया है. इससे लोगों को परेशानी हो रही है.

नगर परिषद की कार्यप्रणाली और शहर के विकास को लेकर आम लोगों में नाराजगी है. लोगों का आरोप है कि नगर परिषद में काम से अधिक कमीशनखोरी पर ध्यान दिया जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने नगर परिषद के कामकाज और शहर की बदहाल स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है.

कार्यपालक पदाधिकारी को हटाने की मांग

आरडी उरांव ने सोशल मीडिया पर कहा कि शहर की मौजूदा स्थिति के लिए कार्यपालक पदाधिकारी जिम्मेदार हैं. उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी को गुमला से हटाने की मांग की. उनका आरोप है कि कार्यपालक पदाधिकारी खुद काम नहीं करते और दूसरे लोगों को भी काम नहीं करने देते. उन्होंने नगर परिषद में अफसरशाही हावी होने की बात कही.

कुंदन कुमार ने कहा कि नगर परिषद के कारण गुमला की बदनामी हो रही है. फिरोज अंसारी ने नालियों की स्थिति को लेकर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की.

घटिया निर्माण को लेकर भी सवाल

शंकर कुमार ने कहा कि शहर में कुछ नालियां बन रही हैं, लेकिन काम की गुणवत्ता ठीक नहीं है. उन्होंने शहर की कई सड़कों के चलने लायक नहीं होने की बात कही और नगर परिषद के अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाया.

गौरव केशरी ने नगर परिषद में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अब पछताये होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत." अनवरूल हक ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार चरम पर है और हर काम में लीपापोती की जाती है.

जांच की मांग, नगर परिषद कथा जारी रखने की अपील

मानस कुमार ने आरोप लगाया कि नगर परिषद में सभी लोगों ने कमीशन खाया है, इसलिए सभी चुप हैं और जांच नहीं हो रही है. वहीं द्वारिकानाथ ने नगर परिषद कथा को जारी रखने की अपील की. उन्होंने उम्मीद जतायी कि इससे शहर की बदहाल स्थिति में कुछ सुधार होगा.

नगर परिषद से जुड़े इन आरोपों और सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है. संबंधित नगर परिषद पदाधिकारी का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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