गुमला नगर परिषद की नाली पर घमासान, घटिया निर्माण के आरोप; 20 सितंबर से आंदोलन की चेतावनी

गुमला नगर परिषद में नाली निर्माण में हो रहे भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के खिलाफ जनता और पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है. जानिए क्या है पूरा मामला.

गुमला. नगर परिषद कथा में आज हम शहर में बन रहे नाली की बात करेंगे. गुमला में चर्चा भी है. साहब का कमीशन और घटिया नाली निर्माण. लोगों का कहना है. अभी शहर में नाली बन रहा है. ठेकेदार तीन नंबर काम करा रहा है. शिकायत करने पर मारपीट की नौबत आ जा रही है. नगर परिषद के साहब को मतलब नहीं. उनका काम हो गया है. इसलिए वे कुछ बोल नहीं सकते.

उपाध्यक्ष गायब हैं. न जांच और न निगरानी. ठेकेदार जैसे तैसे काम करके निकलने में लगे हुए हैं. हालांकि, कुछ जगह नाली निर्माण की जांच अध्यक्ष ने की. जहां गड़बड़ी मिली. परंतु, ठेकेदार यह कहकर अध्यक्ष को घुमा दिये कि काम नगर परिषद का ही है. इंजीनियर के कहने पर नाली बन रहा है.

इधर, लगातार मिल रही शिकायतों व नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व 21 पार्षद चुप हैं. सिर्फ एक पार्षद मनीष कुमार हिंदुस्तान मुखर होकर आंदोलन की चेतावनी दिये हैं. मनीष कुमार ने कहा है कि नाली जनता से वसूले गये राजस्व के पैसे से बन रही है.

विभाग के इओ व इंजीनियर का दायित्व है. काम मजबूत व भ्रष्टाचार मुक्त हो. परंतु, यहां कुछ संवेदक नाली बनाने के नाम पर खिलवाड़ कर रहे हैं. लोगों की शिकायत हर दिन आ रही है. इसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है.

पार्षद मनीष कुमार ने कहा है कि घटिया नाली निर्माण व नगर परिषद के इओ द्वारा गलत तरीके से अधिक कीमत पर खरीदी गयी सामग्री को लेकर धरना-प्रदर्शन देंगे. भूख हड़ताल करेंगे. उन्होंने कहा है कि मुझे जनता ने चुना है. मैं जनता की आवाज बनूंगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलता रहूंगा. इधर, सिटी मैनेजर की विदाई के बाद उपाध्यक्ष उदास हो गये हैं. क्योंकि, सिटी मैनेजर व उपाध्यक्ष की अच्छी सांठ-गांठ थी. इसलिए उपाध्यक्ष शहर की समस्याओं को लेकर बोल नहीं रहे हैं.

वहीं नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर आदिवासी नेता हांदु भगत ने आंदोलन की तैयारी की है. 20 सितंबर से आंदोलन शुरू होगा. उन्होंने कहा है कि नगर परिषद के मामले में गुमला उपायुक्त को गंभीर होना चाहिए. वर्तमान पदाधिकारी के कार्यकाल में हुए विकास के कामों की जांच हो. ताकि शहर के विकास का सच पता चल सके.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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