Gumla: नगर परिषद में सामग्री खरीद मामले में ईओ और पार्षद भिड़े, हुई तीखी बहस

Gumla: गुमला नगर परिषद में सामग्री खरीद से जुड़े मुद्दे पर कार्यपालक पदाधिकारी (EO) और पार्षदों के बीच विवाद हो गया. बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया. पूरी खबर नीचे पढ़ें...

Gumla: गुमला नगर परिषद में सामग्री खरीद का मामला गरमा गया है. घोटाला का आरोप लगने के बाद नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार से पार्षद भिड़ गये. तीखी बहस हुई. पार्षदों ने कहा है कि सामग्री की खरीद नगर परिषद के ईओ ने कराया है, लेकिन यहां वार्ड पार्षदों पर कमीशन खाने का आरोप बाजार में लग रहा है. यह बदनाम करने की साजिश है. पार्षदों ने कहा है कि आखिर खरीद का मामला कैसे उजागर हुआ. मीडिया में कैसे बात सामने आयी. इस प्रकार के कई सवाल पार्षदों ने ईओ से किया. मौके पर ईओ ने पार्षदों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि मीडिया में कैसे बात आयी. मुझे पता नहीं है.

उन्होंने पार्षदों से कहा है कि आप लोग संचिका की जांच कर लें. आपको स्पष्ट हो जायेगा कि नगर परिषद में जितनी भी सामग्री की खरीद हुई है. उसमें किसी प्रकार की घोटाला नहीं हुआ है. नगर परिषद के उपाध्यक्ष ने कहा है कि नगर परिषद द्वारा जितनी भी सामग्री की खरीद हुई है. उसकी जांच होनी चाहिए. ताकि सच्चाई का पता चल सके.

वार्ड पार्षद मनीष हिंदुस्तान ने क्या कहा

वार्ड पार्षद मनीष हिंदुस्तान ने कहा है कि नगर परिषद द्वारा हाल के दिनों में कई प्रकार की सामग्री की खरीद हुई है. इसमें किसी भी वार्ड पार्षद की कोई भूमिका नहीं है, न ही किसी पार्षद ने कमीशन लिया है. घोटाला का जो आरोप लग रहा है या फिर पार्षद दिलीप भगत ने घोटाला को लेकर जो धरना दिया है. इस मामले की जांच होनी चाहिए. सच्चाई क्या है. सामने आये, लेकिन सामग्री खरीद में पार्षदों को बदनाम नगर परिषद न करें.

सरकारी संपत्ति बेच दी, जांच की मांग

इधर, नगर परिषद की सरकारी संपत्ति जो कबाड़ हो गया था. उसे कबाड़ी दुकान में बेच दिया गया. लाखों रुपये की सामग्री बेची गयी है. वार्ड पार्षद दिलीप कुमार भगत ने धरना के माध्यम से सरकारी संपत्ति बेचे जाने के मामले की भी जांच की मांग की है. श्री भगत ने कहा है कि सरकारी संपत्ति बेचने से पहले बोर्ड की बैठक में कोई अनुमति नहीं ली गयी. चोरी चुपके सरकारी संपत्ति को बेचना यह चोरी का मामला है. इसकी भी जांच हो. ताकि पता चले कि बेची गयी सरकारी संपत्ति का पैसा कहां है और अचानक सरकारी संपत्ति बेचने की अनुमति किसने दी. वार्ड पार्षद केके मिश्रा ने भी नगर परिषद के कबाड़ को बेचने के मामले को गंभीर बताते हुए इसकी जांच की मांग की है.

ये भी पढ़ें…

गढ़वा डीसी ने विस्थापितों के लंबित सर्वे को पूरा करने का दिया अल्टीमेटम, 10 जून तक डेडलाइन

झारखंड के आमों की विदेशों में मचेगी धूम: यूके, स्पेन और मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट की तैयारी

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >