मजदूरों ने कहा, कंपनी ने पैसा नहीं दिया, तो लौटने के लिए घर से मंगाना पड़ा

तेलंगाना टनल हादसा. 25 मजदूर फिर लौट रहे गुमला, अब गुमला के बचे आठ मजदूर

By Prabhat Khabar News Desk | February 28, 2025 9:49 PM

गुमला. तेलंगाना के नागरकुरनूल में हुए सुरंग हादसे के बाद गुमला जिले के सभी 65 मजदूर नहर बनाने का काम छोड़ कर गुमला लौट रहे हैं. शुक्रवार को और 25 मजदूर गुमला के लिए निकल गये हैं. सभी मजदूरों ने बस भाड़ा कर हैदराबाद से रायपुर रवाना हो गये हैं. सभी 25 मजदूर एक मार्च को रायपुर पहुंचेंगे. इसके बाद रायपुर से एक मार्च की शाम को पुन: बस में बैठ कर गुमला आयेंगे. मजदूरों ने बताया कि नहर बनवा रही कंपनी गुमला जिले के 65 मजदूरों का तीन माह की मजदूरी नहीं दी है, जिससे सभी मजदूरों को नागरकुरनूल में रहने में परेशानी हो रही थी. इसलिए 27 मार्च को 40 मजदूर गुमला लौट गये, जबकि 25 मजदूर शुक्रवार को गुमला के लिए रवाना हुए हैं. मजदूरों ने बताया कि कंपनी द्वारा मजदूरी भुगतान नहीं करने के कारण सभी के पास पैसा खत्म हो गया था. गुमला वापस आने के लिए घर फोन कर अधिकांश मजदूरों ने अपने एकाउंट में पैसा मंगवाया. इसके बाद बस भाड़ा का पैसा देकर सभी गुमला आ रहे हैं. मजदूरों ने बताया कि अब नागरकुरनूल में मात्र गुमला के आठ मजदूर बचे हुए हैं, जिसमें चार मजदूर सुरंग में फंसे हुए हैं. जबकि चार मजदूर रसोई का काम करते हैं. इसलिए वे लोग नागरकुरनूल में ही रुक गये हैं. क्योंकि रसोईघर में काम करने वाले चारों मजदूरों को किसी प्रकार का जोखिम भरा काम नहीं करना है. इसलिए वे वहीं रुक गये, बाकि 65 मजदूर जो नहर बनाने के लिए सुरंग में घुस रहे थे, वे लोग अपनी जान के खतरा को देखते हुए काम छोड़ कर गुमला लौट रहे हैं.

मजदूर मधु साहू ने कहा, अब सुरंग में काम करना खतरा से भरा

तेलंगाना से गुमला लौट रहे मजदूर मधु साहू ने बताया कि नहर बनाने में अब खतरा है. हमारे जो चार मजदूर सुरंग में फंसे हैं. छह दिन हो गये, अब तक सुराग नहीं मिला है. हालांकि सुरंग में फंसे गुमला के चार समेत कुल आठ मजदूरों को सुरंग से निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन लगा हुआ है. परंतु अब जितना लंबा दिन हो गया. अब मजदूरों के निकलने की उम्मीद कम लग रही है. परंतु अभी भी उम्मीद है कि मजदूरों को निकाल लिया जाये. मधु साहू ने बताया कि जिस सुरंग में हादसा हुआ है. उस सुरंग में दोबारा नहर बनाने का काम खतरों से भरा है. क्योंकि नहर 14 किमी लंबी है. जबकि इसकी ऊंचाई 30 फीट तक है. इसलिए अब कोई भी मजदूर सुरंग में घुस कर दोबारा काम करना नहीं चाहते हैं. इसलिए गुमला जिले के जितने भी मजदूर नहर बनाने में लगे हुए थे. सभी लोग काम छोड़ कर वापस लौट रहे हैं. उन्होंने बताया कि तीन माह की मजदूरी कंपनी के पास बकाया है. हादसे के बाद कंपनी मजदूरी भुगतान नहीं कर रहा है. इसलिए यहां रहने व खाने पीने की समस्या उत्पन्न हो गयी है और हमलोग अपनी जान जोखिम में डाल कर यहां काम करने को तैयार नहीं है.

इन गांवों के मजदूर लौट रहे हैं

गुमला जिले के बरवाटोली, बघिमा, नकटीटोली, खंभिया, कुंबाटोली, घाघरा, कलिगा, अटरिया, जामटोली समेत एक दर्जन गांवों के 65 मजदूर तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में नहर बनाने के काम में लगे थे. इन सभी गांवों के मजदूर अब वापस गुमला लौट रहे हैं. दो दिन में सभी मजदूर गुमला पहुंच जायेंगे.

परिजनों को 50 किमी की दूरी पर रखा गया है

जो चार मजदूर सुरंग में फंसे हुए हैं. उनके परिजन तीन दिन पहले नागरकुरनूल पहुंच गये हैं. परंतु परिजनों को नहर निर्माण स्थल से करीब 50 किमी दूरी पर रखा गया है. रिश्तेदार रवींद्र कुमार ने बताया कि परिजनों को हर दिन सुरंग के समीप ले जाया जाता है. साथ ही मजदूरों को निकालने के लिए हो रही पहल का नजारा दिखाया जाता है. परंतु मजदूरों को कब तक सुरंग से निकाल लिया जायेगा. इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है. इसलिए अब नागरकुरनूल गये परिजन भी परेशान और हताश हो गये हैं. परिजनों ने कहा है कि ईश्वर हमारी मदद करें. सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने का कोई रास्ता दे दें.

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