गुमला. कार्तिक उरांव महाविद्यालय गुमला में सरहुल पूर्व संध्या समारोह हुआ. समारोह में मुख्य भूमिका जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा संकाय के सभी प्राध्यापक व छात्र-छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा. कार्यक्रम की शुरुआत सुमति बालिका छात्रावास के छात्राओं के अना आदि प्रार्थना द्वारा किया. कुड़ुख विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ तेतरू उरांव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सरहुल के महत्व को बताया कि आदिवासी समुदाय इस जन्मोत्सव, नूतन वर्ष, खुशिहाली के रूप में मानती है. कहा कि प्रकृति किसी से भेदभाव नहीं करती है. उसी तरह हमें भी किसी से भेदभाव नहीं करने की सीख देती है. हमने हमें अपने जीवन को बचाने के लिए प्रकृति को बचाना आवश्यक है. मुख्य अतिथि डॉ संजय भोक्ता ने कहा कि प्रकृति हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाती है. उन्होंने सरहुल की महत्व बताते हुए कहा कि जिस प्रकार सखुआ के फूल वृक्ष सुरक्षा मजबूती और प्राकृतिक सौंदर्यता को हमें नवाजता है. साथ ही सरहुल पर एक सुंदर कविता से अपनी वाणी को विराम दिया. नागपुरी विभाग ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया. छात्र प्रदीप कुजूर ने छत्तीसगढ़ी गीत में नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया. हिंदी विभाग के सह प्राध्यापक नीलम, डॉ शंभू, उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर शोएब अंसारी, अर्थशास्त्र विभाग के सहायक अध्यापक डॉक्टर बिंदेश्वर, राजनीतिक विभाग के सहायक अध्यापक अजीत हांसदा, प्रोफेसर नंदकिशोर रजक, प्रोफेसर समीर विलुंग, डॉ चंद्रकिशोर केरकेट्टा, सोहन मुंडा, खेल शिक्षक निरंजन, महाविद्यालय के शिक्षक के कर्मचारी अमितेश कुमार, विनय बड़ाइक उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रोफेसर नंदकिशोर रजक और प्रेमचंद उरांव का महत्वपूर्ण योगदान रहा. संचालन सहायक अध्यापक शशि विनय भगत व धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रेमचंद उरांव ने किया.
प्रकृति किसी के साथ भेदभाव नहीं करती है : डॉ तेतरू
कार्तिक उरांव महाविद्यालय में सरहुल पूर्व संध्या समारोह
