रायडीह. भारत माला सड़क परियोजना का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. शिवालया कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. लट्ठा बरटोली में टाना भगतों की जमीन पर सड़क निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब रायडीह प्रखंड के कटकायां गांव से नया मामला सामने आया है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित सड़क प्राचीन सरना स्थल से होकर बनायी जा रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं. गुरुवार को ग्राम प्रधान हीरालाल एक्का की अध्यक्षता में कटकायां गांव में विशेष बैठक की गयी. बैठक में पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव व कांग्रेस नेता ज्योति कुजूर मुख्य रूप से मौजूद थीं. बैठक का उद्देश्य भारत माला सड़क निर्माण परियोजना से गांव के सरना-मसना स्थल की रक्षा और ग्रामीणों को आंदोलन के लिए एकजुट करना था. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए चुने गये मार्ग के बीचों-बीच वर्षों पुराना सरना स्थल स्थित है. आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा इसे हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं. बैठक में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने गुमला उपायुक्त की उस सर्वे रिपोर्ट को भ्रामक और गलत बताया, जिसमें निर्माण क्षेत्र में किसी धार्मिक स्थल के नहीं होने की बात कही गयी थी. उन्होंने कहा कि सरना स्थल सड़क के ठीक बीच में स्थित है और इसे हटाने की कोशिश आदिवासी संस्कृति व आस्था पर सीधा हमला है. उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है. बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में सड़क निर्माण का विरोध करते हुए कहा कि वे भू-अर्जन विभाग को मिला हुआ मुआवजा लौटाने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन सरना स्थल से किसी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे. ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो उग्र आंदोलन किया जायेगा. बैठक में ज्योति कुजूर, फौदा उरांव, कैप्टन लोहरा उरांव, लोथे उरांव, बिंझू उरांव, टीपरू मुंडा आदि उपस्थित थे.
विकास के नाम पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित नहीं : गीताश्री
भारत माला सड़क परियोजना का विरोध, सरना स्थल बचाने के लिए ग्रामीण एकजुट
