चर्चित तिहरा हत्याकांड में आइआरबी जवान विकास तिवारी को उम्रकैद

गुरदरी पुलिस पिकेट में 2014 में विकास तिवारी ने तीन अधिकारियों की हत्या गोली मार कर की थी

गुमला. गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड स्थित गुरदरी पुलिस पिकेट में 11 साल पहले हुए तिहरे हत्याकांड मामले में जज ने फैसला सुनाया है. गुमला के एडीजे-थ्री भूपेश कुमार की अदालत ने तिहरे हत्याकांड मामले में आइआरबी जवान विकास तिवारी को दोषी पाया है. अदालत ने विकास तिवारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना नहीं चुकाने पर उसे तीन वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी. इस च���्चित तिहरे हत्याकांड मामले में 19 गवाहों की गवाही हुई, जबकि सरकारी पक्ष से अपर लोक अभियोजक सुधीर कुमार टोप्पो ने पैरवी की. तिहरे हत्याकांड का यह मामला वर्ष 2014 के नौ अप्रैल का है. लोकसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले घटना घटी थी. मतदान की तैयारी को लेकर इंडियन रिजर्व बटालियन के जवानों को गुरदरी पिकेट में तैनात किया गया था. देर शाम पिकेट में अचानक गोलीबारी की आवाज सुनायी दी, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी. घटना में सहायक अवर निरीक्षक रतन कुमार जायसवाल, चंदन कुमार और हवलदार शंभू कुमार की मौत हो गयी थी. हमले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गयी थी. घटना के बाद पिकेट में प्रतिनियुक्त यशवंत कुमार के बयान पर जवान विकास तिवारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. प्राथमिकी के अनुसार घटना के दौरान यशवंत पिकेट के बाहर था, तभी अचानक गोली चलने की आवाज आयी थी. कुछ ही क्षण बाद हवलदार शंभू कुमार घायल अवस्था में बाहर निकल कर गिर पड़ा था. इस बीच विकास तिवारी को इंसास रायफल और हैंड ग्रेनेड के साथ पिकेट से भागते देखा गया. जब अन्य जवान पिकेट के अंदर पहुंचे, तो रतन कुमार व चंदन कुमार को मृत अवस्था में पाया गया. घायल शंभु कुमार को इलाज के लिए गुरदरी आरोग्य उपचार केंद्र ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया था. घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी विकास तिवारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में गुमला जेल भेज दिया था. अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और घटनाक्रम के विश्लेषण के आधार पर न्यायालय ने उसे दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी है.

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