कहां से कहां तक है मिडिल ईस्ट; 16 देश रखते हैं दुनिया को बर्बाद करने की हैसियत

Middle East : मिडिल ईस्ट यह शब्द आप सबने सुना होगा, अपने देश में मिडिल ईस्ट को खाड़ी क्षेत्र भी कहा जाता है. क्या आप यह जानते हैं कि मिडिल ईस्ट किसे कहते हैं और इसका महत्व क्या है? अगर नहीं तो यह आलेख पढ़ना आपके लिए बहुत जरूरी है, यह क्षेत्र धार्मिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व के तीन प्रमुख धर्म ईसाई, इस्लाम और यहूदी का जन्म इसी क्षेत्र में हुआ है.

Middle East : 28 फरवरी को जैसे ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला शुरू किया, पूरे देश में खलबली मच गई है. पूरा विश्व यह जानना चाहता है कि आखिर मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ यह युद्ध कब खत्म होगा, क्योंकि इस युद्ध से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. अमेरिका और इजरायल के हमलों का ईरान ने जवाब देना शुरू किया और शुरुआत में इजरायल पर मिसाइल दागे और बाद में अपने पड़ोसी मुल्कों पर भी हमला किया, जिनपर उसे यह शंका है कि वे अमेरिका के साथ खड़े हैं. ईरान मिडिल ईस्ट का एक प्रमुख देश है और उसपर हुए हमले से पूरे मिडिल ईस्ट में अशांति है. हमला शुरू हुए अभी महज 7 दिन ही हुए हैं, अगर यह युद्ध और 7 दिन खिंच गया, तो पूरे विश्व में पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम अप्रत्याशित तरीके से बढ़ सकते हैं.

किसे कहते हैं मिडिल ईस्ट?

जब भी विश्व के किसी भी कोने में ऊर्जा यानी पेट्रोल और गैस की चर्चा होती है मिडिल ईस्ट की भी चर्चा होती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर मिडिल ईस्ट किसे कहते हैं और मिडिल ईस्ट है क्या? मिडिल ईस्ट शब्द यूरोपीय दृष्टिकोण से गढ़ा गया शब्द है, जो एक भौगोलिक क्षेत्र को बताने के लिए प्रयोग में लाया गया है. 19वी– 20वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद जब अपने चरम पर था तो इन लोगों ने विश्व को अपने दृष्टिकोण से नाम दिया. उसी क्रम में यूरोप और एशिया के बीच स्थित इलाके को मिडिल ईस्ट का नाम दिया दिया. इस इलाके में पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्से शामिल हैं. यह भूभाग यूरोप, एशिया और अफ्रीका तीनों महाद्वीपों के बीच स्थित है, इसलिए इसे Geopolitical crossroads भी कहा जाता है.


मिडिल ईस्ट में कौन-कौन से देश आते हैं?

मिडिल ईस्ट में आने वाले प्रमुख देश इस प्रकार हैं–

  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • कतर
  • कुवैत
  • ओमान
  • बहरीन
  • यमन
  • इजरायल
  • फिलिस्तीन
  • जाॅर्डन
  • लेबनान
  • सीरिया
  • इराक
  • ईरान
  • मिस्र
  • तुर्किए

मिडिल ईस्ट का क्यों है इतना महत्व?

मिडिल ईस्ट अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से इतना महत्वपूर्ण है. यह क्षेत्र तीन महाद्वीपों यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच व्यापार और समुद्री मार्गों का केंद्र है. यहां तेल और गैस के भंडार हैं और उन्हें बाहर भेजने के लिए कई महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी हैं, जैसे–

  • होर्मुज जलडमरूमध्य
  • स्वेज नहर
  • बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य

चूंकि यह दुनिया का सबसे प्रमुख समुद्री मार्ग है, जिससे होकर दुनिया के सबसे अधिक तेल का परिवहन होता है. इस वजह से अगर यहां युद्ध की स्थिति बनती है या टकराव होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है.

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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मिडिल ईस्ट या खाड़ी क्षेत्र

खाड़ी क्षेत्र मिडिल ईस्ट का एक हिस्सा है और फारस की खाड़ी की वजह से इस क्षेत्र को खाड़ी क्षेत्र कहा जाता है. इसमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन,ओमान, ईरान और इराक जैसे देश आते हैं. इन देशों में भारत से हजारों लोग रोजगार के लिए जाते हैं. साथ ही इन देशों से भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60 प्रतिशत आयात करता है, इस वजह से भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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