पालकोट. नया अस्पताल भवन बनने के बाद क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें सभी प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पालकोट में डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीणों की यह उम्मीद अभी भी अधूरी है. प्रखंड के लोग आज भी समुचित इलाज के लिए बड़े अस्पतालों का सहारा लेने को मजबूर हैं. जानकारी के अनुसार केंद्र में कुल 11 डॉक्टरों के पद सृजित हैं, लेकिन फिलहाल यहां केवल तीन डॉक्टर ही कार्यरत हैं. इनमें प्रभारी चिकित्सक डॉ पूजा पल्लवी भगत, एक एमबीबीएस डॉक्टर और एक दंत चिकित्सक शामिल हैं. ऐसे में यदि किसी जिला स्तरीय बैठक में डॉक्टरों को शामिल होना पड़ता है, तो अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और बढ़ जाती है. इस संबंध में प्रभारी चिकित्सक डॉ पूजा पल्लवी भगत ने बताया कि केंद्र में डॉक्टरों की कमी की जानकारी जिला प्रशासन को दी जा चुकी है. वहीं बीडीओ विजय उरांव ने कहा कि जिला स्तरीय बैठकों में इस समस्या को उठाया जाता है, लेकिन फिलहाल पूरे झारखंड राज्य में ही डॉक्टरों की भारी कमी है.
लोगों ने कहा, नर्सों के भरोसे चल रहा है केंद्र
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को लेकर स्थानीय लोगों ने भी नाराजगी जतायी है. पालकोट गांधी नगर बस्ती के होटल संचालक मेघनाथ प्रजापति ने कहा कि सरकार ने यहां भव्य अस्पताल भवन तो बना दिया, लेकिन डॉक्टरों की कमी से इसका पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. डॉक्टरों की नियुक्ति हो जाने से लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. युवा अजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि यदि डॉक्टरों की कमी दूर हो जाये, तो यहां बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकती है. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में आये दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता. हाल ही में एक महिला की मौत भी इसी वजह से हो गयी. नगर बस्ती के बुजुर्ग गणपत प्रसाद ने कहा कि अस्पताल में अक्सर डॉक्टर नहीं रहते और नर्सों के भरोसे ही केंद्र चल रहा है. इतने बड़े अस्पताल का संचालन एक-दो डॉक्टरों के भरोसे कैसे हो सकता है. लौवाकेरा गांव की महिला एडलीन इंदवार ने कहा कि अस्पताल भवन बड़ा और अच्छा बना है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वहीं डांड़टोली निवासी फुलकेरिया किंडो ने बताया कि परिवार में किसी के बीमार होने पर जब वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, तो डॉक्टरों की कमी से उचित इलाज नहीं मिल पाता.
