स्कूल के लिए दान की 4.44 एकड़ जमीन पर कब्जे की कोशिश 16 साल बाद कैसे हुआ दाखिल-खारिज

सिसई के मुरगु गांव में स्कूल के लिए दान की गई सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश. ग्रामीणों ने सीओ को सौंपा आवेदन, जांच की मांग की.

सिसई. प्रखंड के मुरगु गांव में स्कूल के लिए बिहार सरकार के राज्यपाल को दान दी गयी भूमि की अवैध खरीद-बिक्री कर उस पर कब्जा करने का मामला सामने आया है. इसको लेकर मुरगु व नागफेनी के ग्रामीणों ने सोमवार को सीओ अशोक बड़ाईक को आवेदन सौंपकर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. आवेदन के साथ ग्रामीणों ने निबंधन कार्यालय से निकाला गया दानपत्र का नकल भी सौंपा है.

1983 में स्कूल के लिए राज्यपाल के नाम दान हुई थी जमीन

आवेदन में कहा गया है कि मुरगु गांव के हरिशंकर साहू, बंधना साहू, सहदु साहू, हरिमोहन साहू, केशरी साहू, जगनारायण साहू, महेश्वर नाथ पंडित व रामधारी सिंह ने 17 मार्च 1983 को कुल 4 एकड़ 44 डिसमिल भूमि स्कूल संचालन हेतु बिहार सरकार के राज्यपाल के नाम निबंधन कार्यालय में दान कर दिया था. उक्त भूमि पर वर्षों से मिडिल व हाईस्कूल संचालित हो रहा है.

जमीन पर स्कूल के अलावा स्मारक और सरकारी भवन भी

उसी भूमि पर वीर शहीद तेलंगा खड़िया स्मारक के साथ सरकारी सांसद भवन व सांस्कृतिक कला भवन भी बना हुआ है. बाकी खाली जगह का उपयोग मैदान के रूप में किया जाता है. जहां बच्चों के खेलने के साथ रावण दहन, ताजिया मिलान, वीर शहीद तेलंगा खड़िया जयंती सहित विभिन्न सामाजिक आयोजन होते आ रहे हैं.

2010 में भी हुआ था कब्जे का प्रयास

ग्रामीणों ने बताया कि जमीन पर अवैध कब्जे का पहला प्रयास 2010 में किया गया था. उस समय विरोध के कारण कब्जा करने वाले सफल नहीं हो पाये थे. कब्जा करने वालों द्वारा रजिस्ट्री कराने की बात सामने आने पर ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज करायी. जिसके बाद अंचल कार्यालय ने दाखिल-खारिज करने से इनकार कर दिया था.

16 साल बाद कैसे हो गया दाखिल-खारिज

इधर, 16 साल बीत जाने के बाद सिसई अंचल कार्यालय द्वारा कब दाखिल-खारिज कर दिया गया. इसकी भनक तक ग्रामीणों को नहीं लगी. चार दिन पहले जब जेसीबी लगाकर कब्जा करने का प्रयास किया गया, तब ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत की. गांव में तनाव का माहौल है.

शिकायत के बाद भी अधिकारी के नहीं पहुंचने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी अब तक अंचल कार्यालय का कोई अधिकारी या कर्मी गांव का जायजा लेने नहीं पहुंचा है. अंचल कार्यालय इस गंभीर मामले में उदासीनता बरत रहा है.

सीओ बोले- जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है

इस संबंध में सीओ अशोक बड़ाइक से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आवेदन प्राप्त हुआ है. व्यस्तता के कारण जा नहीं पाये. जांच के लिए अमीन व हल्का कर्मचारी को लगाया गया है. जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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