सिसई. प्रखंड के मुरगु गांव में स्कूल के लिए बिहार सरकार के राज्यपाल को दान दी गयी भूमि की अवैध खरीद-बिक्री कर उस पर कब्जा करने का मामला सामने आया है. इसको लेकर मुरगु व नागफेनी के ग्रामीणों ने सोमवार को सीओ अशोक बड़ाईक को आवेदन सौंपकर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. आवेदन के साथ ग्रामीणों ने निबंधन कार्यालय से निकाला गया दानपत्र का नकल भी सौंपा है.
1983 में स्कूल के लिए राज्यपाल के नाम दान हुई थी जमीन
आवेदन में कहा गया है कि मुरगु गांव के हरिशंकर साहू, बंधना साहू, सहदु साहू, हरिमोहन साहू, केशरी साहू, जगनारायण साहू, महेश्वर नाथ पंडित व रामधारी सिंह ने 17 मार्च 1983 को कुल 4 एकड़ 44 डिसमिल भूमि स्कूल संचालन हेतु बिहार सरकार के राज्यपाल के नाम निबंधन कार्यालय में दान कर दिया था. उक्त भूमि पर वर्षों से मिडिल व हाईस्कूल संचालित हो रहा है.
जमीन पर स्कूल के अलावा स्मारक और सरकारी भवन भी
उसी भूमि पर वीर शहीद तेलंगा खड़िया स्मारक के साथ सरकारी सांसद भवन व सांस्कृतिक कला भवन भी बना हुआ है. बाकी खाली जगह का उपयोग मैदान के रूप में किया जाता है. जहां बच्चों के खेलने के साथ रावण दहन, ताजिया मिलान, वीर शहीद तेलंगा खड़िया जयंती सहित विभिन्न सामाजिक आयोजन होते आ रहे हैं.
2010 में भी हुआ था कब्जे का प्रयास
ग्रामीणों ने बताया कि जमीन पर अवैध कब्जे का पहला प्रयास 2010 में किया गया था. उस समय विरोध के कारण कब्जा करने वाले सफल नहीं हो पाये थे. कब्जा करने वालों द्वारा रजिस्ट्री कराने की बात सामने आने पर ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज करायी. जिसके बाद अंचल कार्यालय ने दाखिल-खारिज करने से इनकार कर दिया था.
16 साल बाद कैसे हो गया दाखिल-खारिज
इधर, 16 साल बीत जाने के बाद सिसई अंचल कार्यालय द्वारा कब दाखिल-खारिज कर दिया गया. इसकी भनक तक ग्रामीणों को नहीं लगी. चार दिन पहले जब जेसीबी लगाकर कब्जा करने का प्रयास किया गया, तब ग्रामीण अंचल कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत की. गांव में तनाव का माहौल है.
शिकायत के बाद भी अधिकारी के नहीं पहुंचने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी अब तक अंचल कार्यालय का कोई अधिकारी या कर्मी गांव का जायजा लेने नहीं पहुंचा है. अंचल कार्यालय इस गंभीर मामले में उदासीनता बरत रहा है.
सीओ बोले- जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है
इस संबंध में सीओ अशोक बड़ाइक से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आवेदन प्राप्त हुआ है. व्यस्तता के कारण जा नहीं पाये. जांच के लिए अमीन व हल्का कर्मचारी को लगाया गया है. जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.
