दुर्जय पासवान, गुमला
Gumla News: गुमला के मजदूरों के साथ बनारस में मारपीट हुई है. बनारस के ईंट भटठे में मजदूरों को बंधक भी बनाकर रखा गया था. प्रताड़ित भी किया गया. जब मजदूरों ने मजदूरी की मांग किया तो उन्हें बनारस से भगा दिया गया. मजदूरों ने गुमला पहुंचकर इसकी शिकायत श्रम विभाग गुमला से की है. साथ ही ईट भटठा मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने और मजदूरी भुगतान कराने की मांग की है. श्रम अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मजदूरों को न्याय दिलाने की पहल शुरू कर दी है. सिसई के समाज सेवी संजय वर्मा ने कहा है कि कुछ दिन पहले असम राज्य में भी गुमला के मजदूरों के साथ मारपीट की घटना घटी थी. अभी बनारस में दूसरी घटना घटी है. लगातार गुमला के मजदूरों के साथ दूसरे राज्यों में मारपीट, अन्याय और काम कराकर मजदूरी नहीं देने का मामला आ रहा है. प्रशासन इस पर सख्ती दिखाए.
एजेंट के माध्यम से बनारस गए थे 20 मजदूर
सिसई प्रखंड के पीड़ित मजदूरों ने उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठा मालिक और स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाने, मारपीट करने, बाल श्रम कराने और महीनों की गाढ़ी कमाई हड़पने का आरोप लगाया है. इस संबंध में पीड़ितों ने गुमला के श्रम अधीक्षक को लिखित आवेदन देकर न्याय और बकाया राशि दिलाने की गुहार लगायी है. शिकायतकर्ता सिसई के लकेया बांस टोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्तूबर 2025 में स्थानीय एजेंट ने उन्हें और करीब 20 अन्य ग्रामीणों को 15,000 रुपये प्रति माह वेतन का वादा कर बनारस के सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठे पर भेजा था. लेकिन भट्ठे पर पहुंचने के बाद उन्हें मजदूरी के बजाय गुजारे के नाम पर महज 1500 रुपये दिए जाते थे और दिन-रात कड़ी मेहनत कराई जाती थी. पीड़ितों का आरोप है कि बकाया पैसे मांगने पर भट्ठा मालिक डबलू सिंह उनके साथ गाली-गलौज और बेरहमी से मारपीट करता था.
भटठा में मजदूरों के साथ मारपीट की गई
मजदूरों ने आवेदन में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया गया कि भट्ठे पर नाबालिग बच्चों से भी जबरन मजदूरी करायी जाती थी. प्रताड़ना से तंग आकर कई मजदूर जान बचाकर भाग गए. जबकि जगरनाथ तुरी सहित चार मजदूर किसी तरह छह महीने 15 दिन टिके रहे. अंततः भट्ठा मालिक ने उन्हें बिना पैसे दिए मारपीट कर भगा दिया. वर्तमान में इन चार मजदूरों का 3,90,000 रुपये बकाया है. भुक्तभोगी मजदूरों ने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा अपने खून-पसीने की कमाई वापस दिलाने की मांग की है.
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