गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
गुमला : गुमला नगर परिषद में भ्रष्टाचार की कहानी एक बार फिर बाहर आई है. ताजा मामला शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत से जुड़ा है, जहां कार्यपालक पदाधिकारी (EO) मनीष कुमार पर बिना बोर्ड को सूचना दिये चोरी-छिपे 1.30 लाख रुपये का 'टेबल टेंडर' निकालने और चहेते संवेदक को मौखिक आदेश पर ठेका देने का गंभीर आरोप लगा है. हैरत की बात यह है कि रातों-रात ढाली गई सड़क सूरज उगते ही उखड़ गई, जिसके बाद नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने कार्यपालक पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रातों-रात सीमेंट-बालू का लेप, सुबह होते ही उखड़ी सड़क
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के बस पड़ाव जाने वाली सड़क, बड़ाइक मोहल्ला स्थित श्रीदुर्गा मंदिर और डीएसपी रोड स्थित रानी सती दादी मंदिर के समीप जर्जर सड़क की मरम्मत होनी थी. आरोप है कि कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार ने बोर्ड को अंधेरे में रखकर गुमला के संवेदक मो. शमीम को मौखिक रूप से सड़क बनाने का काम दे दिया. ठेका मिलते ही संवेदक ने जल्दबाजी में रात के अंधेरे में सीमेंट, बालू और चिप्स का मिश्रण डालकर सड़क बना दी. नतीजा यह हुआ कि सुबह होते ही बड़ाइक मोहल्ला और डीएसपी रोड की सड़क पपड़ी बनकर उखड़ गई.
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मामले के तूल पकड़ते ही EO का खंडन
अखबारों में सड़क टूटने की खबर छपते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. अब नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का प्रयास करते दिख रहे हैं. उन्होंने बाकायदा प्रेस बयान जारी कर दावा किया है कि नगर परिषद द्वारा कोई टेंडर या काम नहीं कराया गया है. हालांकि, ठेकेदार मो. शमीम के बयान ने कार्यपालक पदाधिकारी के दावों की हवा निकाल दी है. उन्होंने खुलकर कहा है कि उसने ईओ के मौखिक आदेश पर ही 1.30 लाख रुपये के टेबल टेंडर के तहत तीनों सड़कों की मरम्मत की थी.
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने EO की कार्यशैली पर उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद नगर परिषद अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने इसे गंभीरता से लिया है. उपाध्यक्ष ने बताया कि सड़क बनाने वाले मुंशी से बात करने पर स्पष्ट हुआ कि काम ईओ के मौखिक आदेश पर ही हुआ था. वहीं अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने कहा कि ईओ लगातार ऐसे काम चोरी-छिपे करते हैं. अगर ईओ ने काम नहीं कराया तो फिर रातों-रात सड़क बनकर उखड़ कैसे गई?
किसने क्या कहा?
नगर परिषद ने किया खंडन
"समाचार में सड़क मरम्मत से संबंधित किसी भी प्रकार का कार्य अथवा टेंडर हाल के दिनों में नगर परिषद द्वारा संपन्न नहीं कराया गया है. समाचार में प्रकाशित तथ्यों का नगर परिषद गुमला पूर्ण रूप से खंडन करता है."
-मनीष कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी (EO), नगर परिषद गुमला
क्या कहते हैं ठेकेदार
"नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार के मौखिक आदेश (टेबल टेंडर) पर ही गुमला शहर में बस पड़ाव, दुर्गा मंदिर व डीएसपी रोड की टूटी सड़क की मरम्मत की गई है. यह टेबल टेंडर 1.30 लाख रुपये का हुआ था."
-मो. शमीम, संवेदक, गुमला
क्या कहते हैं उपाध्यक्ष
"मैंने सड़क बनाने वाले मुंशी से बात की है. मुंशी ने बताया कि रात में सड़क की मरम्मत हुई थी. सड़क नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के मौखिक आदेश पर ठेकेदार ने बनाई थी, जो बनते ही टूट गई."
-रमेश कुमार चीनी, उपाध्यक्ष, नगर परिषद गुमला
अध्यक्ष ने क्या कहा
"सड़क बनी और टूट भी गई. अगर कार्यपालक पदाधिकारी टेबल टेंडर निकालकर सड़क नहीं बनवाए हैं, तो फिर सड़क कैसे बनकर टूट गई? इस प्रकार का चोरी-छिपे काम करना बिल्कुल गलत है."
-शकुंतला उरांव, अध्यक्ष, नगर परिषद गुमला
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