गुमला: लगभग नौ वर्ष पूर्व चार वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म के एक चर्चित मामले में अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए असली दोषी अमित कुजूर को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-4) सह विशेष पोक्सो न्यायाधीश संजीव भाटिया की अदालत ने सिकरी जारी गांव निवासी अमित कुजूर को पोक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत दोषी पाया.
अदालत ने दोनों धाराओं के तहत आरोपी पर 50-50 हजार रुपये, यानी कुल एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. जुर्माना राशि नहीं देने की स्थिति में दोषी को दो-दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. इस मामले में सरकार की ओर से लोक अभियोजक सुधीर टोप्पो ने पैरवी की.
बेगुनाह दिव्यांग को काटनी पड़ी 3 साल की जेलइस मामले का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि अपराध किसी और ने किया, लेकिन सजा एक बेगुनाह को भुगतनी पड़ी. अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 20 अगस्त 2017 की है.
दुष्कर्म के बाद रोती हुई मासूम बच्ची को देखकर गांव का दिव्यांग युवक लेपड़ा खड़िया उसे मदद की नीयत से घर पहुंचाने गया था. लेकिन परिजनों ने संदेह के आधार पर उसी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करा दी. पुलिस ने आनन-फानन में लेपड़ा खड़िया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जहां वह करीब तीन वर्षों तक सलाखों के पीछे रहा.
कोलकाता भाग गया था असली आरोपी, ऐसे खुला राजघटना को अंजाम देने के बाद असली आरोपी अमित कुजूर कोलकाता फरार हो गया था. लगभग तीन साल बाद जब वह गांव लौटा, तो उसने एक अन्य बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया. इस दौरान ग्रामीणों ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया. कड़ाई से पूछताछ करने पर अमित ने 2017 में मासूम बच्ची के साथ किये गये दुष्कर्म की बात भी स्वीकार कर ली.
आरोपी के इकबालिया बयान के बाद पुलिस ने मामले की पुनार्विवेचना की. सच्चाई सामने आने के बाद अदालत ने दिव्यांग लेपड़ा खड़िया को सम्मानपूर्वक बरी कर दिया था. अब लंबी सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने वास्तविक अपराधी अमित कुजूर को कठोर सजा सुनाकर मामले में न्याय सुनिश्चित किया है.
