डूरंड कप की ट्रॉफी गुमला पहुंचना गौरव की बात : उपायुक्त

एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप की ट्रॉफी गुमला पहुंची। उपायुक्त ने इसे जिले के खेल प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताया है।

गुमला: एशिया के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के 135वें संस्करण की ट्रॉफी सोमवार को फुटबॉल प्रतिभाओं की धरती कहे जाने वाले गुमला पहुंची. इस अवसर पर परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम में आयोजित समारोह में ट्रॉफी का पारंपरिक नृत्य, ढोल-नगाड़ों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया.

कार्यक्रम के उपरांत उपायुक्त दिलेश्वर महतो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां एवं जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर ने संयुक्त रूप से डूरंड कप ट्रॉफी रैली को हरी झंडी दिखाकर शहर भ्रमण के लिए रवाना किया. रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने ट्रॉफी का स्वागत किया और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया. झारखंड को पहली बार डूरंड कप की मेजबानी का अवसर मिला है. आगामी 26 जुलाई से 10 अगस्त तक रांची के मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में होने वाली डूरंड कप के टूर्नामेंट के मुकाबले खेले जायेंगे. उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने कहा है कि डूरंड कप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की ट्रॉफी का गुमला आगमन जिले के लिए अत्यंत गौरव की बात है.

एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट की ट्रॉफी के स्वागत के लिए गुमला जिले का चयन किया जाना अपने आप में जिले की खेल संस्कृति और पहचान को दर्शाता है. गुमला को लंबे समय से खिलाड़ियों की नर्सरी के रूप में जाना जाता रहा है. डूरंड कप जैसे बड़े आयोजन से जिले के युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी तथा वे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायेंगे.

उन्होंने भारतीय सेना एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आयोजन के माध्यम से गुमला के खिलाड़ियों को एक बड़े मंच से जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है. डूरंड कप का यह आयोजन निश्चित रूप से युवाओं में खेल भावना को मजबूत करेगा और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगा.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उप विकास आयुक्त गुमला अनिमेष रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी सदर अखिलेश कुमार, कैप्टन पुष्पराज पाटिल, एनडीसी ललन कुमार रजक, एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव, जिला खेल पदाधिकारी प्रवीण कुमार, जिला परिषद की उपाध्यक्ष संयुक्ता देवी, बिशुनपुर विधायक के प्रतिनिधि सुनील उरांव, अमित एक्का, रॉबर्ट टोप्पो, मो रिजवान, प्रदीप राम सहित अन्य लोग मौजूद थे. डूरंड कप की ट्रॉफी भारतीय खेलों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है : एसपी पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां ने कहा कि डूरंड कप ट्रॉफी का गुमला आगमन जिले के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है. उन्होंने कहा कि यह ट्रॉफी भारतीय खेलों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है तथा इसके माध्यम से देश के गौरवशाली खेल इतिहास की झलक देखने को मिलती है. उन्होंने डूरंड कप के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है. इसमें भारतीय खिलाड़ियों ने समय-समय पर अपने अनुशासन, कौशल एवं पराक्रम से वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है.

राज्य में फुटबॉल संस्कृति को नयी पहचान मिलेगी : डीएफओ जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर ने कहा कि गुमला की खेल संस्कृति को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि डूरंड कप ट्रॉफी का आगमन जिले की खेल भावना को नई ऊर्जा प्रदान करेगा. उन्होंने जिले के सभी फुटबॉल खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे. उन्होंने कहा कि गुमला को झारखंड की फुटबॉल नर्सरी माना जाता है. डूरंड कप जैसे बड़े आयोजन से राज्य में फुटबॉल संस्कृति को नई पहचान तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी.


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