गुमला पहली बार पहुंची डुरंड कप की ट्रॉफी, डीसी-एसपी ने किया भव्य स्वागत

डूरंड कप की प्रतिष्ठित ट्रॉफी का गुमला में भव्य स्वागत किया गया. इस साल, फुटबॉल का यह सबसे पुराना टूर्नामेंट पहली बार झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित हो रहा है. जानें टूर्नामेंट के बारे में सब कुछ.


गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Durand Cup 2026: एशिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डुरंड कप के 135वें संस्करण का आयोजन इस बार पहली बार झारखंड की राजधानी रांची में होने जा रहा है. इसी ऐतिहासिक आयोजन के तहत डुरंड कप ट्रॉफी का सोमवार को गुमला में भव्य स्वागत किया गया. शहर में ट्रॉफी भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां विभिन्न स्थानों पर लोगों ने उत्साह के साथ इसका स्वागत किया. इस दौरान खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला.

गुमला स्टेडियम में हुआ भव्य स्वागत समारोह

डुरंड कप ट्रॉफी के गुमला पहुंचने पर गुमला स्टेडियम में स्वागत समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में उपायुक्त दिलेश्वर महतो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां, डीएफओ अहमद बेलाल अनवर, डीडीसी अनिमेष रंजन, एसडीओ अखिलेश कुमार, एनडीसी ललन रजक, जिला खेल पदाधिकारी प्रवीण कुमार, सेना के कैप्टन पुष्पराज पाटिल तथा जिला परिषद की उपाध्यक्ष संयुक्ता देवी समेत कई प्रशासनिक अधिकारी और खेल प्रेमी मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान फैंसी फुटबॉल मैच का भी आयोजन किया गया, जिसमें खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया. आयोजन का उद्देश्य लोगों में फुटबॉल के प्रति रुचि बढ़ाना और डुरंड कप को लेकर जागरूकता फैलाना था.

पहली बार रांची में होगा डुरंड कप

इस साल डुरंड कप का आयोजन पांच शहरों, रांची, कोलकाता, गुवाहाटी, शिलांग और इम्फाल में किया जा रहा है. रांची पहली बार इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा, जिसे झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. टूर्नामेंट में झारखंड का प्रतिनिधित्व जमशेदपुर एफसी करेगी. रांची को ग्रुप-सी के मुकाबलों की मेजबानी की जिम्मेदारी मिली है. इससे राज्य में फुटबॉल को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

1888 में हुई थी डुरंड कप की शुरुआत

जिला खेल पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि डुरंड कप की शुरुआत वर्ष 1888 में हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित ऐतिहासिक अन्नाडेल मैदान से हुई थी. यह प्रतियोगिता भारतीय फुटबॉल की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है. उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट की शुरुआत ब्रिटिश इंडियन आर्मी ने की थी. उस समय भारत के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डुरंड के सम्मान में इस प्रतियोगिता का नाम डुरंड कप रखा गया. प्रारंभिक वर्षों में इसमें केवल सेना की रेजिमेंटों की टीमें हिस्सा लेती थीं, लेकिन समय के साथ इसमें देश के प्रमुख फुटबॉल क्लबों और अन्य टीमों को भी शामिल किया जाने लगा.

24 टीमें लेंगी हिस्सा

डुरंड कप के 135वें संस्करण में कुल 24 टीमें भाग लेंगी, जिन्हें छह ग्रुप में विभाजित किया गया है. देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होने वाले मुकाबले भारतीय फुटबॉल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा मंच प्रदान करेंगे. रांची में पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के आयोजन से न केवल झारखंड की खेल संस्कृति को नई पहचान मिलेगी, बल्कि राज्य के युवा खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता को करीब से देखने और उससे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा. खेल प्रेमियों के लिए यह आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं माना जा रहा है.

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रांची के मोरहाबादी फुटबॉल ग्राउंड में होगा मुकाबला

  • 26 जुलाई: जमशेदपुर एफसी बनाम डिफेंडर्स एफसी : शाम 5 बजे
  • 29 जुलाई: इंडियन एयर फोर्स बनाम डिफेंडर्स एफसी : शाम 7 बजे
  • 4 अगस्त: जमशेदपुर एफसी बनाम एससी दिल्ली : शाम 4 बजे
  • 7 अगस्त: एससी दिल्ली बनाम डिफेंडर्स एफसी : शाम 4 बजे
  • 10 अगस्त: एससी दिल्ली बनाम इंडियन एयर फोर्स : शाम 7 बजे
  • 13 अगस्त: जमशेदपुर एफसी बनाम इंडियन एयर फोर्स : दोपहर 4 बजे
  • 16 अगस्त: क्वार्टर फाइनल 1 {विजेता (टीम-1) बनाम विजेता (टीम-2) : शाम 4 बजे}

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Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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