डुमरी में सूखे की चपेट में हजारों एकड़ खेत, पानी की कमी के कारण धान की रोपाई नहीं कर पा रहे किसान

गुमला के डुमरी में मानसून की बेरुखी से हजारों एकड़ खेत सूखे की चपेट में हैं। पानी की कमी के कारण किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं, प्रशासन से मदद की मांग।

डुमरी: गुमला के डुमरी पाचोरा के हजारों एकड़ खेत सूखे की चपेट में है. किसानों की निगाहें आसमान की ओर टिकी हुई है. कमजोर मानसून ने इस बार डुमरी पाचोरा के डुमरी, पतराटोली, बासाटोली, बेलटोली, जितियाटोली, भेड़ीताल, टांगरडीह ग्राम क्षेत्र के किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है.

जुलाई माह समाप्त होने के बावजूद क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने से हजारों एकड़ कृषि भूमि सूखे की कगार पर पहुंच गयी है. खेतों में धान की रोपाई के लिए तैयार किया गया बिचड़ा लगभग तैयार हो चुका है. लेकिन खेतों में पानी नहीं रहने के कारण किसान रोपाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं. दूर-दूर तक खेत सूखे पड़े हैं.

हर दिन किसान आसमान में छाये काले बादलों को उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं. लेकिन बादल बिना बरसे ही लौट जा रहे हैं. बारिश की अनिश्चितता ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खेती का सबसे महत्वपूर्ण समय निकलता जा रहा है और समय पर रोपाई नहीं होने से अच्छी पैदावार की उम्मीद भी कमजोर पड़ती जा रही है.

किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की खेती पर गंभीर संकट खड़ा हो जायेगा. क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई के समुचित साधनों का अभाव है. अधिकांश किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं. सिंचाई हेतु वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. आर्थिक रूप से कमजोर किसान निजी साधनों से सिंचाई कराने में भी असमर्थ हैं.

ऐसे में उनकी पूरी खेती भगवान भरोसे चल रही है. किसानों का कहना है कि हर वर्ष मानसून की बेरुखी उन्हें आर्थिक संकट में धकेल देती है. लेकिन स्थायी सिंचाई व्यवस्था की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है.

यदि आने वाले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो हजारों किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर सकता है. किसानों ने प्रशासन से सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए आवश्यक राहत उपाय शुरू करने की मांग की है.


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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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