चैनपुर. चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में इन दिनों इलाज से अधिक लापरवाही व मनमानी देखने को मिल रही है. यहां पदस्थापित चिकित्सक अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा दूर-दराज से आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जो पूरी तरह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर हैं. लापरवाही का ताजा मामला मंगलवार को सामने आया, जब दोपहर करीब दो बजे मीरा कुमारी, रीमा देवी व आराध्या कुमारी समेत कई मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे. ड्यूटी रोस्टर के अनुसार इस समय डॉक्टर की तैनाती निर्धारित थी, लेकिन हकीकत में डॉक्टर साहिबा नदारद रहीं. न तो उन्होंने अवकाश के लिए कोई आवेदन दिया था और न ही उनकी अनुपस्थिति का कोई स्पष्ट कारण बताया गया. घंटों इंतजार के बाद मरीजों को निराश होकर बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा. स्थानीय लोगों ने बताया कि कड़े संघर्ष व लंबे आंदोलन के बाद चैनपुर में चार डॉक्टरों की नियुक्ति की गयी थीं. इससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब रेफरल की समस्या खत्म होगी और घर के पास ही बेहतर इलाज मिल सकेगा, लेकिन डॉक्टरों की लगातार गैरहाजिरी ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. सरकारी डॉक्टर उपलब्ध न होने की स्थिति में मरीजों को मजबूरी में निजी क्लिनिकों का रुख करना पड़ता है, जहां इलाज के नाम पर उनसे मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं. बीमारी की पीड़ा के साथ-साथ अब लोगों को आर्थिक मार भी झेलनी पड़ रही है. डॉक्टरों की लेटलतीफी व लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों और मरीजों में आक्रोश है. पीड़ितों ने गुमला के उपायुक्त व सिविल सर्जन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने व बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों पर विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था दोबारा पटरी पर लौट सके.
चैनपुर सीएचसी में डॉक्टरों की मनमानी, ड्यूटी के समय गायब रहने से मरीज बेहाल
डॉक्टर की गैरमौजूदगी से लौटे मरीज, मजबूरी में निजी क्लिनिकों में इलाज कराने को विवश
