गुमला के आईआरबी कैंप में मनाया गया 17वां स्थापना दिवस, एसपी ने कर्तव्य के प्रति समर्पण को बताया पुलिस बल की पहचान

गुमला के नागफेनी स्थित आइआरबी कैंप में 17वां स्थापना दिवस मनाया गया। एसपी हारिस बिन जमां ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और जवानों के कर्तव्य की सराहना की।

गुमला: शहर के नागफेनी स्थित आईआरबी कैंप में 17वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया. मुख्य अतिथि के रूप में एसपी हारिस बिन जमां उपस्थित थे. इसके अलावा, आईआरबी डीएसपी अजीत कुमार कुजूर और रक्षित पदाधिकारी विजय प्रसाद समेत पुलिस बल के जवान और पदाधिकारी मौजूद थे.

जवानों ने एसपी को दी गार्ड ऑफ ऑनर

कार्यक्रम की शुरुआत आइआरबी के शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई. इसके बाद एसपी हारिस बिन जमां को जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. एसपी ने परेड का निरीक्षण किया और जवानों की सलामी ली.

अनुशासन, कर्तव्य और सेवा भाव का प्रदर्शन

समारोह के दौरान अनुशासन, कर्तव्य और सेवा भावना का प्रदर्शन देखने को मिला. स्थापना दिवस के अवसर पर कैंप परिसर में फलदार पौधे लगाये गये. अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की.

पूरी निष्ठा से कर्तव्य निभा रहे आईआरबी के जवान: एसपी

एसपी ने कहा कि आईआरबी का 17 वर्षों का सफर अनुशासन, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना से भरा रहा है. पुलिस बल के जवान विषम परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं. जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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पुलिस की सेवा केवल नौकरी नहीं

उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है. जवानों को हर परिस्थिति में धैर्य, अनुशासन और मानवता के साथ काम करना चाहिए. एसपी ने शहीद जवानों को नमन करते हुए कहा कि जिन वीर जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है. उनका त्याग पुलिस बल के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा.

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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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