गुमला. गुमला के राजेंद्र प्रसाद गुप्ता पूर्व वार्ड कमिश्नर हैं. वे गुमला नगरपालिका क्षेत्र से दो बार 1983 व 1988 में वार्ड कमिश्नर बने. इसके बाद 1993 से सरकार ने चुनाव नहीं कराया. काफी आंदोलन व हाईकोर्ट में केस के बाद पुन: 2008 में नगर निकाय का चुनाव हुआ था. इसके बाद अब हर पांच साल में चुनाव हो रहा है. पूर्व वार्ड कमिश्नर राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने अपने जमाने के चुनाव, शहर के विकास व नगरपालिका के प्रतिनिधियों के कामों की जानकारी दी. साथ ही अब के पार्षदों के अलावा नगर परिषद के कार्यों पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि हमारे जमाने में नगरपालिका को जो फंड मिलता था, उसमें एक-एक पैसा विकास के कामों में खर्च होता था. हर काम ईमानदारी से होता था. पहले नगरपालिका में किसी प्रकार की चोर बाजारी नहीं हुआ करती थी. छोटा ऑफिस था, उसी में नगरपालिका की पूरी टीम बैठती थी और शहर के विकास के लिए प्लान बना कर काम करती थी. चुनाव भी पारदर्शी होता था. वर्ष 1993 से पहले शहर में गंदगी अधिक नहीं होती थी. उस समय शहर भी छोटा था व जनसंख्या भी कम थी. परंतु अब नगर परिषद के कामों पर नजर डाले, तो बिना घूसखोरी के कुछ नहीं होगा. हर योजना में कमीशन होता है. शहर के विकास के लिए अब कोई प्लान नहीं है. आवास योजना में लूट मची हुई है. हर आवास में 15 से 20 हजार का घूस लिया जाता है. ऐसे मामलों में तो एक जांच टीम बननी चाहिए, ताकि पैसा लेने वाले लोगों पर कार्रवाई हो सके. श्री गुप्ता ने कहा कि ऐसे अभी भी कई ऐसे पार्षद हैं, जो ईमानदारी से काम किये हैं. कई मुहल्लों में ईमानदारी से विकास का काम दिखता है. इस बार नगर परिषद का चुनाव होने वाला है. वोटरों से अपील है कि वे सोच समझ कर ईमानदार पार्षद का चयन करें. क्योंकि ईमानदार पार्षद आयेंगे, तो इन्हीं के बीच से ईमानदार उपाध्यक्ष का भी चयन होगा.
सोच समझ कर ईमानदार पार्षद का चयन करें : राजेंद्र गुप्ता
नगरपालिका क्षेत्र से दो बार 1983 व 1988 में बने थे वार्ड कमिश्नर
