Gumla News: पहली बार बच्चों ने डाकघर की पत्रपेटी में डाली राखी और चिट्ठियां, चेहरे पर दिखी खुशी

गुमला के बाल पाठशाला स्कूल के बच्चों ने पहली बार डाकघर जाकर अपने परिजनों को राखी और पत्र भेजे। डाक विभाग ने बच्चों का उत्साहवर्धन कर उन्हें चॉकलेट बांटी।

गुमला: हाथों में रंग-बिरंगी राखियां, आंखों में उत्साह और अपनों तक स्नेह पहुंचाने की खुशी. बुधवार को गुमला मुख्य डाकघर में ऐसा ही मनमोहक नजारा देखने को मिला. बाल पाठशाला प्ले स्कूल के नन्हे बच्चे पहली बार सामूहिक रूप से डाकघर पहुंचे और अपने हाथों से तैयार की गयी राखियों के साथ परिजनों के नाम लिखी चिट्ठियां पत्रपेटी में डालकर डाक की दुनिया से अपना पहला रिश्ता जोड़ा.

रक्षाबंधन के अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने स्वयं राखियां तैयार की थीं. इसके बाद इन राखियों को डाक विभाग के लिफाफों में रखकर बच्चों ने अपने परिजनों के लिए चिट्ठियां लिखीं. बुधवार को शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यालय की प्राचार्या के साथ बच्चे गुमला मुख्य डाकघर पहुंचे. यहां बच्चों ने उत्साह के साथ अपने पत्र पत्रपेटी में डाले.

नन्हे बच्चों को पहली बार चिट्ठी पोस्ट करते देखकर डाकघर के कर्मचारी भी उत्साहित नजर आये. पत्रपेटी में चिट्ठी डालने के बाद बच्चे यह जानने के लिए उत्सुक थे कि उनकी राखी और चिट्ठी कब तक अपने भाई-बहनों और परिजनों तक पहुंचेगी.

चॉकलेट देकर बढ़ाया बच्चों का उत्साह

गुमला मुख्य डाकघर की ओर से बच्चों का स्वागत किया गया. मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव निरंजन ओहदार एवं सुनील ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया. डाकघर परिवार की ओर से बच्चों को चॉकलेट भी खिलायी गयी. चॉकलेट पाकर बच्चों की खुशी और बढ़ गयी और वे उत्साहपूर्वक अपने पत्र डाकपेटी में डालकर लौटे.

चिट्ठी सिर्फ कागज नहीं, रिश्तों की भावनाओं का पुल

पोस्टमास्टर शिव शंकर ठाकुर ने कहा कि रक्षाबंधन को लेकर डाक विभाग के माध्यम से राखी और शुभकामना संदेश भेजने को लेकर लोगों में उत्साह है. इस बार खास बात यह रही कि बड़े लोगों के साथ नन्हे बच्चे भी डाक विभाग से जुड़कर अपने परिजनों तक राखी और स्नेह का संदेश भेज रहे हैं. उन्होंने कहा कि चिट्ठी महज कागज का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि भावनाओं, यादों और रिश्तों को जोड़ने वाला माध्यम है.


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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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