गढ़पहाड़ से दुर्जय पासवान की ग्राउंड रिपोर्ट
Gumla News: अंग्रेजों से युद्ध के बाद शहीद हुए वीर बख्तर साय व वीर मुंडल सिंह के परिजन आज भी गुमनामी की जिंदगी जीने को विवश हैं. शहादत के बाद से लेकर आज तक शहीद के परिजनों को शहीद के नाम से ना कोई सरकारी लाभ मिला. ना कोई नौकरी मिली. यहां तक कि गांव का विकास भी सही तरीके से नहीं हुआ है. शहीद के परिजन झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के अंतर्गत वासुदेवकोना देवडाड़ गांव में रहकर खेतीबारी कर अपना भरण पोषण और जीविका चला रहे हैं.
देश के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे बख्तर साय
वीर शहीद बख्तर साय के वंशजों ने कहा कि हमारे पूर्वज वीर शहीद बख्तर साय देश के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे. पर, आज सरकार और प्रशासन वीर शहीद को ही भुला दिए. आज तक शहीद के परिजनों को किसी प्रकार का कोई भी सरकारी लाभ नहीं मिला और ना ही किसी परिजन को नौकरी मिली. आज हम सभी वंशज बदहाली की जिंदगी जी रहे हैं.
शहादत दिवस मनाने को भी पैसा नहीं
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन ने मिलकर पतराटोली रायडीह के चौक में वीर शहीद बख्तर साय और वीर शहीद मुंडल सिंह की मूर्ति स्थापित कर दी. स्थापना के दो वर्षों तक प्रशासन ने शहीद दिवस मनाने के लिए खर्च मुहैया कराया. उसके बाद से आज तक प्रशासन ने शहादत दिवस मनाने के लिए कुछ भी खर्च नहीं किया. पतराटोली रायडीह में जो शहीद चौक बना है. वह भी जर्जर हो गया है. परिजन व ग्रामीण आपस में चंदा कर शहादत दिवस मनाते हैं.
गढ़पहाड़ को पार्क बनाने का सपना अधूरा
शहीद के वंशजों ने बताया कि गढ़पहाड़ को पार्क बनाने की मांग लंबे अरसे से हो रही है. गुमला विधायक भूषण तिर्की ने विधानसभा सत्र के दौरान सदन में गढ़पहाड़ का मुददा उठाये थे. लेकिन अबतक गढ़पहाड़ पार्क नहीं बना. न ही इसके विकास के लिए किसी ने पहल शुरू की है. देवडांड़ गांव में वीर शहीद बख्तर साय के वंशज रामविलास सिंह, शंकर सिंह, बालक सिंह, नंदलाल सिंह, अकबर सिंह, शंभु सिंह, त्रिलोक सिंह, रोमन सिंह, बलिराम सिंह, भगीरथ सिंह, वकील सिंह, कृति सिंह, भीमकरण सिंह के परिवार रहते हैं जो पुर्णरुपेण खेती-बारी में आश्रित हैं. परिजनों ने मांग किया है की शहीद की मूर्ति व चौक की मरम्मत कराई जाए. साथ ही, वीर शहीद की कर्मभूमि गढ़पहाड़ को पार्क के रूप में विकसित किया जाए. इस क्षेत्र को पर्यटक स्थल घोषित किया जाये. साथ ही परिजनों को शहीद के नाम पर सरकारी लाभ दिया जाये.
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रूसु भगत को ताम्रपत्र मिला था
रायडीह प्रखंड के रूसु भगत जिन्हें 15 अगस्त 1972 ईस्वी को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रांची दौरा के क्रम में ताम्रपत्र सौंपा था, अब रूसु भगत का निधन हो गया. लेकिन उनके परिवार के पास आज भी ताम्रपत्र सुरक्षित रखा हुआ है. पालकोट, रायडीह, गुमला व चैनपुर प्रखंड में रौतिया जाति की काफी जनसंख्या है.
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