सिसई (गुमला): आर्थिक तंगी और टूटे आशियाने में वृद्ध नानी के साथ जीवन गुजार रहा अनाथ अमर बिरहोर आधार कार्ड नहीं होने के कारण पढ़ाई से वंचित होने के कगार पर है. अमर सकरौली सरकारी विद्यालय में पांचवीं कक्षा तक पढ़ चुका है, लेकिन आधार कार्ड नहीं होने के कारण छठी कक्षा में उसका नामांकन नहीं हो पा रहा है. मामले की जानकारी मिलने पर कई लोग अमर के घर पहुंचे और उसकी पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल ड्रेस, जूता, बैग, कॉपी, पेन, स्टोमेन बॉक्स, छाता समेत अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करायी. साथ ही परिवार को राशन भी दिया. लोगों ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक से मुलाकात कर अमर की पढ़ाई जारी रखने की अपील की. प्रधानाध्यापक ने बताया कि आधार कार्ड नहीं होने से बच्चे को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होगी.
बचपन में ही उठ गया माता-पिता का साया
अमर के नाना बिसारो बिरहोर ने बताया कि जब अमर कुछ माह का ही था, तभी उसके माता-पिता का निधन हो गया. अमर चार भाई-बहनों में से एक है. उसके भाई दूसरे राज्यों में मजदूरी करने जाते हैं. बिसारो ने बताया कि कच्ची दीवार पर किसी तरह करकट और प्लास्टिक डालकर वह बच्चों की परवरिश कर रहे हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है. परिवार के पास बिसारो के नाम से हरा राशन कार्ड है, जिसमें केवल उनका नाम दर्ज है. इसके तहत उन्हें महज पांच किलो अनाज मिलता है. वृद्धावस्था पेंशन और पांच किलो राशन ही परिवार की जीविका का एकमात्र सहारा है. इसी के भरोसे पांच सदस्यों का परिवार किसी तरह जीवन गुजार रहा है. बड़े पोते भी बचपन से मजदूरी कर परिवार की आर्थिक मदद करते रहे हैं.
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नानी ने प्रशासन से लगायी मदद की गुहार
बरसात के दौरान परिवार का कच्चा घर भी ढह गया. इसके बाद बिसारो ने किसी तरह छप्पर तैयार कर पोते-पोतियों के साथ रहने का इंतजाम किया है. बारिश होने पर परिवार की परेशानी और बढ़ जाती है. टूटे घर और सीमित संसाधनों के बीच बच्चों का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है. अमर की नानी बिसारो ने प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है. उन्होंने कहा कि राशन कार्ड में परिवार के सभी सदस्यों के नाम दर्ज नहीं हैं और मिलने वाला अनाज परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है. उन्होंने प्रशासन से अमर का आधार कार्ड बनवाने, पीला राशन कार्ड उपलब्ध कराने, चारों बच्चों के नाम राशन कार्ड में जोड़ने तथा परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने की मांग की है.
