35 में से 17 छात्रावास बंद

गुमला : गुमला जिले में कल्याण विभाग के 17 छात्रावासों में ताला लटका हुआ है. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, जिले में आदिम जनजाति, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के 35 छात्रावास है. इनमें से मात्र 18 छात्रावास ही चालू हैं. इन छात्रावासोंमें भी सुविधा का अभाव है. बंद छात्रावासोंको खोलने के लिए कल्याण […]

गुमला : गुमला जिले में कल्याण विभाग के 17 छात्रावासों में ताला लटका हुआ है. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, जिले में आदिम जनजाति, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के 35 छात्रावास है. इनमें से मात्र 18 छात्रावास ही चालू हैं. इन छात्रावासोंमें भी सुविधा का अभाव है. बंद छात्रावासोंको खोलने के लिए कल्याण विभाग द्वारा पहल भी नहीं की जा रही है. जो छात्रवास चालू हैं, वहां भी कहीं रसोईया नहीं है, तो कहीं बिजली-पानी की समस्या है.
कई छात्रावास हैं, जिसकी छत से पानी टपकता है. छात्रावासों के अलावा कल्याण विभाग द्वारा संचालित 11 आवासीय विद्यालयों की स्थिति भी ठीक नहीं है. एक दो विद्यालय को छोड़ दिया जाये, तो सभी की स्थिति बदहाल है. संसाधन व शिक्षकों की कमी के कारण कई विद्यालय बंदी के कगार पर हैं. कमोबेश सभी विद्यालय में भवन, पानी, बिजली व रसोईया की समस्या है.
कई विद्यालय में मात्र दो से तीन ही शिक्षक हैं, जिनके भरोसे वर्ग एक से लेकर दस तक की शिक्षण व्यवस्था निर्भर है. विज्ञान, अंगरेजी व गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी है. इन स्कूलों का रिजल्ट भी खराब होता है, जबकि सरकार हर वर्ष लाखों रुपये देती है.
सीनियर छात्र बन गये अधीक्षक : गुमला में चालू 18 छात्रावास जैसे-तैसे चल रहे हैं. इसका मुख्य कारण छात्रावास अधीक्षक का नहीं होना है. कई छात्रावास में सीनियर छात्र ही अधीक्षक बन गये हैं. छात्रावास अधीक्षक को कल्याण विभाग द्वारा प्रति माह 350 रुपये मानदेय देने का प्रावधान है. परंतु 15 वर्षो से किसी भी अधीक्षक ने मानदेय नहीं लिया है.
कंप्यूटर है, परंतु बिजली नहीं है : आवासीय विद्यालय जोभीपाट, चापाटोली, कंदापाट व सखुवापानी में आदिम जनजाति विद्यार्थियों को कंप्यूटर की शिक्षा देने के लिए सरकार ने चार वर्ष पूर्व कंप्यूटर उपलब्ध कराये हैं. पर बिजली नहीं रहने के कारण अभी तक कंप्यूटर चालू नहीं हुआ है.

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