नागपुरी भाषा झारखंड की सभ्यता व संस्कृति की पहचान

गुमला: शहर के वीर कुंवर सिंह स्मृति भवन में सोमवार को पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया. उदघाटन दीप जला कर किया गया. पुस्तक लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि शाहनी उपेंद्र पाल नहन ने कोटाम निवासी रामउचित सिंह रचित पुस्तक ‘नागपुरी लय राग मंजरी’ का लोकार्पण किया. श्री नहन ने पुस्तक को बड़ी उपलब्धि […]

गुमला: शहर के वीर कुंवर सिंह स्मृति भवन में सोमवार को पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया. उदघाटन दीप जला कर किया गया. पुस्तक लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि शाहनी उपेंद्र पाल नहन ने कोटाम निवासी रामउचित सिंह रचित पुस्तक ‘नागपुरी लय राग मंजरी’ का लोकार्पण किया.

श्री नहन ने पुस्तक को बड़ी उपलब्धि बताया. नागपुरी साहित्यकार ने कहा कि पुस्तक के लघु काव्य को देख कर मैं आश्चर्य में हूं कि इनकी लेखन सामग्री समुद्र के समान है. नागपुरी अपनी भाषा है. इसकी समृद्धि के लिए हम सभी को आगे आना होगा. हमारी संस्कृति की विशेष पहचान नागपुरी भाषा ही है.

मेरी इच्छा है कि नागपुरी भाषा में महाकाव्य की रचना की जाये. कार्यक्रम में वक्त धनंजय नाथ तिवारी, सेवानिवृत्त शिक्षक तेजपाल राम, हफीजुर रहमान, मनोहर महंती, विजय बहादुर सिंह ने कहा कि समाज व संस्कृति का दर्पण हमारी भाषा है. हमें कई एक विधाओं से भाषा के द्वारा प्रचार-प्रसार कर सकते हैं. साथ ही उसे अपना बना सकते हंै. इससे पूर्व अध्यक्षीय भाषण में ईश्वरदत्त दूबे ने कहा कि हमें नागपुरी भाष को समृद्ध करना है. साथ ही इसकी समृद्धि के लिए हम सभी को समर्पण करना आवश्यक है. कार्यक्रम में मंच का संचालन डोमन राम मोची व धन्यवाद ज्ञापन महावीर साहू ने किया. मौके पर भाजपा युवा नेता मिशिर कुजूर, सुरेश सिंह, सकलदीप सिंह, हरिहर साव, राजकुमार दीनबंधु, कमल महतो, दिलीप सिंह सहित कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे.

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