गुमला की एतवारी 23 साल बाद मुक्त, दलालों ने 1992 में दिल्ली में बेच दिया था

गुमला : वर्ष 1992 में दिल्ली ले जाकर बेची गयी पालकोट की एतवारी को गुमला पुलिस ने मुक्त करा लिया है. उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हवाले किया गया है, जहां उसका बयान लिया गया. एतवारी जब आठ साल की थी, तभी उसे दिल्ली में बेचा गया था. दलालों ने पहचान छुपाने के लिए उसे […]

गुमला : वर्ष 1992 में दिल्ली ले जाकर बेची गयी पालकोट की एतवारी को गुमला पुलिस ने मुक्त करा लिया है. उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हवाले किया गया है, जहां उसका बयान लिया गया.
एतवारी जब आठ साल की थी, तभी उसे दिल्ली में बेचा गया था. दलालों ने पहचान छुपाने के लिए उसे रीता नाम दिया था. एतवारी के पिता का निधन हो चुका है. 23 साल बाद वह अपनी बूढ़ी मां से मिलेगी. फिलहाल एतवारी कमेटी के संरक्षण में रहेगी. कमेटी पूरी जांच -पड़ताल के बाद एतवारी को उसके परिजनों को सौंपेगी. सीडब्ल्यूसी के सदस्य अलख सिंह व धनंजय सिंह ने बताया कि लोटवा गांव जाकर पहले परिजनों का पता करेंगे.
बसिया थाना के एएसआइ विपिन कुमार दुबे ने बताया कि एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम दिल्ली गयी थी. दिल्ली में गोल्फ लिंक कोर्स रोड, गुड़गांव स्थित रैना रिबलो के घर से एतवारी को मुक्त कराया गया है. मैथ्यू साहब नामक व्यक्ति ने एक साल पहले उसे रैना के घर में रखा था. मैथ्यू अभी विदेश में है. उसके ठिकाने का पता किया जा रहा है.
पूछताछ में पता चला है कि मैथ्यू बैंक में काम करता है. अधिकांश समय वह विदेश में रहता है.23 साल तक घर से निकलने नहीं दिया गया : एतवारी ने बताया : घर में बूढ़ी मां है. 23 साल से उससे नहीं मिली, न ही कभी बात की. जब मैं आठ साल की थी, मुङो दिल्ली ले जाया गया था. मैथ्यू नामक व्यक्ति के घर में रखा गया था. वहां घर के सारे काम कराये जाते थे.
मैथ्यू विदेश जाता था, तो वह मुङो किसी जान पहचान वाले के यहां छोड़ जाता था. मुङो कभी घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था. डांट- फटकार मिलती थी. 23 साल तक काम करने के बावजूद मजदूरी के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं मिली.

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