गुमला : गुमला जिला जंगल व पहाड़ों से घिरा है. इसकी भौगोलिक बनावट दूसरे जिलों से भिन्न है. नक्सलवाद, पिछड़ेपन व पलायन के कारण गुमला को जरूर गरीब जिला कहा गया है, लेकिन देश के मानचित्र में गुमला अपनी एक अलग पहचान है.इसकी वजह, यहां के प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक स्थल व पर्यटन स्थल हैं. यहां की जो बनावट है, हर जगह इतिहास छिपा है.
गुमला में राष्ट्रीय व राजकीय महत्व के 18 पर्यटन स्थल

गुमला में राष्ट्रीय व राजकीय महत्व के 18 पर्यटन स्थल
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गुमला : गुमला जिला जंगल व पहाड़ों से घिरा है. इसकी भौगोलिक बनावट दूसरे जिलों से भिन्न है. नक्सलवाद, पिछड़ेपन व पलायन के कारण गुमला को जरूर गरीब जिला कहा गया है, लेकिन देश के मानचित्र में गुमला अपनी एक अलग पहचान है.इसकी वजह, यहां के प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक स्थल व पर्यटन स्थल हैं. […]
गुमला जिले में तीन ऐसे ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल हैं, जो राष्ट्रीय महत्व के हैं. इनमें सिसई प्रखंड का नवरत्न गढ़, डुमरी प्रखंड का टांगीनाथ धाम व गुमला प्रखंड का आंजनधाम है. ये तीनों न सिर्फ गुमला के धरोहर हैं, बल्कि राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर इन तीनों को महत्वपूर्ण धरोहर माना गया है.
हालांकि सरकार ने अभी तक सिर्फ सिसई प्रखंड के नवरत्न गढ़ को विश्व धरोहर के रूप में मानते हुए इसे वर्ल्ड हैरिटेज में शामिल किया है. वहीं गुमला जिले में 15 ऐसे स्थल हैं, जो राजकीय महत्व के हैं. ये 15 धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल भी आज की युवा पीढ़ी को इतिहास की जानकारी देने के लिए काफी हैं.
ऐसे प्रशासन ने पूरे गुमला जिले में 40 पर्यटन स्थलों की सूची तैयार की है, जिसमें तीन राष्ट्रीय महत्व, 15 राजकीय महत्व 22 स्थलों को स्थानीय महत्व में रखा गया है. प्रशासन ने गुमला के पर्यटन स्थलों को तीन केटेगरी में भी बांटा है. जिसमें बी केटेगरी यानी राष्ट्रीय महत्व, सी यानी राजकीय महत्व व डी केटेगरी यानी स्थानीय महत्व के पर्यटन स्थल हैं.