न पीने के लिए पानी, न चलने के लिए है सड़क

कुलाबीरा बरटोली के ग्रामीणों का जीवन भगवान भरोसे ग्रामीणों ने उपायुक्त से गांव की समस्याओं को दूर करने की गुहार लगायी गुमला : सदर प्रखंड गुमला के कुलाबीरा बरटोली के ग्रामीणों का जीवन भगवान भरोसे है. गांव में ग्रामीणों के पीने के लिए न तो पानी है और न ही चलने के लिए सड़क ही […]

कुलाबीरा बरटोली के ग्रामीणों का जीवन भगवान भरोसे

ग्रामीणों ने उपायुक्त से गांव की समस्याओं को दूर करने की गुहार लगायी
गुमला : सदर प्रखंड गुमला के कुलाबीरा बरटोली के ग्रामीणों का जीवन भगवान भरोसे है. गांव में ग्रामीणों के पीने के लिए न तो पानी है और न ही चलने के लिए सड़क ही है.
वहीं यदि बिजली की बात करें तो आठ साल पहले तक गांव में बिजली सेवा बहाल थी. परंतु ट्रांसफारमर जल जाने के कारण गांव के ग्रामीण पिछले आठ सालों से अंधेरे में ही रहने को विवश हैं. इसमें भी गांव के ग्रामीणों की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बिना बिजली जलाये ही गांव के बिजली उपभोक्ताओं को विभाग द्वारा छह-छह हजार रुपये का बिजली बिल दिया गया है और बिल भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है.
ग्रामीणों ने अपनी इस समस्या को उपायुक्त शशि रंजन के समक्ष रखा है. मंगलवार को जनता दरबार में ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन सौंप गांव में पानी, बिजली व सड़क सेवा बहाल करने की गुहार लगाते हुए बिजली बिल में सुधार कराने की मांग की है. समीर खड़िया, बंधु खड़िया, गौबा बिलुंग, बुधराम बिलुंग, शोभा खड़ियाइन, झुगलु गोप, हजारी खड़िया, पुष्कर खड़िया, तारा खड़ियाइन, बसंती खड़िया, मंगरा खड़िया, श्रवण बिलुंग, शीला बिलुंग, अहलु गोप, भोनो देवी, भोला खड़िया, दसई गोप, कोल्हा गोप, धारमा खड़िया, रौदी खड़ियाइन, अंगनु खड़िया सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में न तो पीने के लिए पानी है और न ही चलने के लिए सड़क ही है.
पानी की पूर्ति के लिए गांव के लोग रोजाना दो किमी का दौड़ लगाते हैं. तब कहीं जाकर पानी नसीब होता है. गांव में पानी आपूर्ति के लिए कोई भी साधन नहीं है. सड़क की बात करें तो पूरे गांव में कहीं भी सड़क नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बिजली सेवा के लिए उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिया गया है.
बिजली सप्लाइ के लिए 10 केबी का ट्रांसफारमर भी लगाया गया है. परंतु आठ साल पहले वर्ष 2011 में ट्रांसफारमर जल गया. विद्युत विभाग को जले हुए ट्रांसफारमर को मरम्मत कराने की मांग करते आ रहे हैं. परंतु अब तक ट्रांसफारमर का मरम्मत नहीं किया गया है. पिछले आठ सालों से गांव में बिजली नहीं है. परंतु सभी उपभोक्ताओं को छह-छह हजार रुपये का बिजली बिल दिया गया है.

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