गांव में रोजगार नहीं, करौंदा से 200 लोगों का पलायन

गुमला : 1959 में दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमैटिक पावर स्टेशन का प्रारूप बनाने वाले व लोहरदगा संसदीय क्षेत्र से तीन बार सांसद रहे स्वर्गीय कार्तिक उरांव के पैतृक गांव करौंदा से 150 से 200 ग्रामीण पलायन कर गये. करौंदा गांव गुमला प्रखंड से 13 किमी दूर है. इस गांव में काम नहीं है. मनरेगा […]

गुमला : 1959 में दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमैटिक पावर स्टेशन का प्रारूप बनाने वाले व लोहरदगा संसदीय क्षेत्र से तीन बार सांसद रहे स्वर्गीय कार्तिक उरांव के पैतृक गांव करौंदा से 150 से 200 ग्रामीण पलायन कर गये. करौंदा गांव गुमला प्रखंड से 13 किमी दूर है. इस गांव में काम नहीं है. मनरेगा से संचालित कार्य भी ठप हैं.

खेतीबारी के लिए सिंचाई का साधन नहीं है. बरसात में ही खेती करते हैं. इसबार बारिश भी नहीं हुई थी, जिन किसानों ने फसल लगायी थी, उनकी फसल भी बर्बाद हो गयी. इसलिए गांव के लोग रोजी-रोजगार की तलाश में कोई दिल्ली, गोरखपुर, बनारस, गोवा तो कोई असम चला गया. सभी लोग एक साल के अंदर में पलायन किये हैं. अभी भी पलायन जारी है.

अधिकतर लोग गोरखपुर के ईंट भट्ठा में मजदूरी करने के लिए पलायन किये हैं. पलायन करने वालों में अधिकतर पुरुष हैं. गांव की लड़कियां भी दिल्ली चली गयी है. लगातार इस गांव से पलायन हो रहा है, लेकिन प्रशासन को इसकी खबर नहीं है.

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