नवनी गांव का रमेश साहू खुद मेला में खिलौना बेचता था. अब उसका सपना बीए के बाद यूपीएससी की परीक्षा पास करना है.
गुमला/घाघरा : हौसलें बुलंद हो, तो गरीबी बाधा नहीं बनती. बस जज्बा व अपने ऊपर आत्मविश्वास रखना जरूरी है. इसी बात को सार्थक कर रहा है घाघरा प्रखंड के घोर उग्रवाद प्रभावित नवनी गांव का रमेश साहू. रमेश साहू ने इंटर कला संकाय में परचम लहराया है. 377 अंक प्राप्त कर वह गुमला जिला टॉपर बना है. रमेश की कहानी अजीब है.
उसके पिता लक्ष्मण साहू मजदूर हैं. वे नवनी गांव से तीन किमी दूर स्थित ईंट भट्ठा में मजदूरी करते हैं. वहीं खुद जिला टॉपर रमेश मेला में बैलून व खिलौना बेचता है. जिस समय आर्ट्स का रिजल्ट प्रकाशित हुआ, रमेश गांव के मेला में बैलून व खिलौना बेच रहा था. उसे खुद पता नहीं था कि वह जिला टॉपर बना है. उसे अपने साथियों व लॉर्ड इंटर बुद्धा इंटर कॉलेज के निदेशक अनिरुद्ध प्रसाद के माध्यम से पता चला कि वह प्रथम श्रेणी से पास हुआ है.
चूंकि रमेश लॉर्ड इंटर कॉलेज से परीक्षा लिख कर सफलता प्राप्त की है, इसलिए कॉलेज के निदेशक अनिरुद्ध चौबे ने अपने छात्र रमेश का रिजल्ट पता किया, तो पता चला कि रमेश घाघरा प्रखंड की गुदड़ी का लाल निकला. वह न पूरे प्रखंड, बल्कि पूरे गुमला जिला में टॉपर रहा है. रमेश कुमार ने कहा कि मैं अपनी सफलता का श्रेय लॉर्ड बुद्धा कॉलेज को देता हूं, जिसके सभागार में मैं पढ़ कर आज जिला टॉपर बना हूं. स्कूल के निदेशक अनिरुद्ध सर लगातार मुझे बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते थे. मेरे पिता ने खुद मजदूरी कर मुझे पढ़ाया. रमेश ने बताया कि मेरी मां का निधन वर्ष 2009 में हो गया. इसके बाद मेरे पिता ही मां-बाप बन कर मुझे पाला. मेरा छोटा भाई विजय साहू है, जो सातवीं कक्षा में पढ़ता है. दो बहने हैं, जिनकी शादी हो गयी है. रमेश ने कहा कि अब उसका सपना बीए पास करने के बाद यूपीएससी की परीक्षा पास कर आइएएस बनना है. इधर, रमेश की सफलता से उसके पिता लक्ष्मण साहू गदगद हैं. उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि उनके बेटे ने कमाल कर दिखाया है. लॉर्ड बुद्धा कॉलेज के निदेशक ने कहा कि रमेश में आगे बढ़ने की क्षमता है.
कपड़ा व्यवसायी की बेटी छठे स्थान पर
घाघरा प्रखंड के देवाकी गांव निवासी रामजीवन साहू की बेटी श्रुति कुमारी भी टॉप टेन में छठे स्थान पर रही. उसने लॉर्ड बुद्धा इंटर कॉलेज घाघरा से परीक्षा लिखी थी. श्रुति ने 365 अंक प्राप्त कर छठा स्थान प्राप्त किया है. श्रुति के पिता कपड़ा व्यवसायी हैं. श्रुति अपनी सफलता श्रेय स्कूल परिवार और अपने माता-पिता को देती है. श्रुति ने कहा कि अब उसका अगला लक्ष्य इतिहास ऑनर्स में बीए करने के बाद यूपीएससी की परीक्षा पास करना है.
