पिताम्बरकिता स्वास्थ्य उपकेंद्र का हाल बेहाल

42 लाख की लागत से बना भवन, लेकिन अब भी पगडंडी ही रास्ता

सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावों के बीच गोड्डा जिले के ठाकुरगंगटी प्रखंड स्थित पिताम्बरकिता उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार बना हुआ है. यह उपकेंद्र स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर रहा है, जहां सुविधाओं का अभाव, लचर प्रबंधन और प्रशासनिक उदासीनता साफ झलकती है. वर्ष 2020 में 42 लाख रुपये की लागत से उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन तो बन गया, परंतु आज तक वहां तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं बन पायी. चारों ओर खेतों से घिरे इस केंद्र तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को आज भी पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है. बरसात में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

केंद्र सिर्फ कागजों पर सक्रिय, जमीनी स्तर पर शून्यता

स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह स्वास्थ्य केंद्र केवल नाम मात्र का है. आवश्यक सुविधाएं नदारद हैं और स्वास्थ्य सेवाएं केवल कागजों तक सीमित हैं. समय पर केंद्र का नहीं खुलना, स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति और औपचारिकता भर का संचालन ग्रामीणों की निराशा का मुख्य कारण बन गया है. उपस्वास्थ्य केंद्र में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अक्सर समय पर नहीं पहुंचतीं. ग्रामीणों का आरोप है कि कभी-कभार जब वह आती भी हैं, तो दवाएं सहिया को सौंप कर चली जाती हैं या वहीं से फोन पर परामर्श देकर इलाज कर देती हैं. इससे इलाज की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं.

हजारों की आबादी को नहीं मिल रहा लाभ

यह उपस्वास्थ्य केंद्र कजरैल, गझंडा, पीताम्बरकिता और बेलवा जैसे गांवों के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन आज भी अधिकांश ग्रामीण बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हैं. कई बार मरीजों को निजी क्लिनिक या दूरस्थ अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बोझ साबित होता है. स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कभी भी इस केंद्र की निगरानी या निरीक्षण के लिए नहीं आते हैं. न ही स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है. इससे ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश दोनों व्याप्त है. जब इस संबंध में सीएचओ ने कहा कि मैं फिलहाल ट्रेनिंग में हूं. उन्होंने बताया कि वह इस समय ट्रेनिंग में हैं. हालांकि, यह जवाब भी ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SANJEET KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >