संवाददाता, गोड्डा. शहर के श्री श्याम मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है. जन्माष्टमी के दिन मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन हुआ. इस दौरान कई बच्चे राधा-कृष्ण के मनमोहक स्वरूप में नजर आये. बच्चों का यह रूप श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा.
‘आत्मा तू राधिका’, कृष्ण भक्ति से टूट जाती हैं दुखों की जंजीरें
भागवत कथा के दौरान कथावाचक श्री शरण ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि ‘आत्मा तू राधिका’, अर्थात यह आत्मा ही राधिका है, जो श्रीकृष्ण की प्रेयसी है. उन्होंने कहा कि राधा और कृष्ण का संबंध प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है.
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि कान्हा के जन्म से पहले वसुदेव और देवकी जंजीरों से बंधे जेल की सलाखों के पीछे यातनाएं सह रहे थे. मध्यरात्रि में जब भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया तो वसुदेव उन्हें बचाने के लिए काली रात, मूसलाधार बारिश और उफनती यमुना की धारा के बीच लेकर निकल पड़े. कान्हा के जन्म के साथ ही देवकी के सारे कष्ट दूर हो गये और जंजीरें टूट गयीं.
कृष्ण की शरण में आने से दूर होते हैं जीवन के बंधन
श्री शरण ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन में भक्ति और समर्पण का संदेश भी देता है. उन्होंने कहा कि जो मनुष्य कान्हा की शरण में रहता है और राधा की भक्ति करता है, उसके जीवन के दुखों की जंजीरें भी धीरे-धीरे टूट जाती हैं. सच्ची भक्ति मनुष्य को कठिन परिस्थितियों से निकलने का मार्ग दिखाती है.
राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजे बच्चों ने मोहा मन
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और कथा का आयोजन किया गया. कई जोड़े बच्चे राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजकर पहुंचे. उनकी मनमोहक वेशभूषा ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा.
कार्यक्रम में कथावाचक श्री शरण के साथ उनकी अर्धांगिनी राजश्री वत्स एवं पुत्र भी उपस्थित रहे. वहीं, जजमान के रूप में प्रीतम गाडिया अपनी धर्मपत्नी के साथ मौजूद रहे.
