पोड़ैयाहाट से रवि ठाकुर की रिपोर्ट
Godda News : आजादी के 78 साल बाद भी झारखंड के गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड का बड़ा राज दाहा गांव पक्की सड़क की बुनियादी सुविधा से वंचित है. गांव की लगभग 1000 की आबादी आज भी कच्ची-पथरीली पगडंडी पर चलने को मजबूर है .बरसात में यह रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है और गर्मी में धूल उड़ती है.
सड़क नहीं होने से ग्रामीणों का जीवन बेहाल
गांवासियों का कहना है कि कई बार आवेदन देने और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी सड़क निर्माण की फाइल बस कागजों में ही घूम रही है. एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. बीमार, गर्भवती महिला या बुजुर्ग को खटिया या चारपाई पर लादकर 2 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. बच्चों को स्कूल जाने में रोज परेशानी होती है. बैग और कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं. किसान अपनी उपज मंडी तक नहीं ले जा पाते, जिससे उन्हें फसल का सही दाम नहीं मिलता.
वादों से नाराज ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीण महानंद ठाकुर ने कहा कि वोट मांगने के समय नेता वादा करके चले जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता. सुमित्रा देवी ने बताया कि पिछले साल प्रसव पीड़ा के दौरान उनकी बहू को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका था.
सड़क नहीं बनी तो होगा आंदोलन
गांव के युवा अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर एक महीने के अंदर सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो सभी ग्रामीण मिलकर मुख्य सड़क जाम करेंगे और प्रखंड कार्यालय के सामने धरना देंगे. पंचायत प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मनरेगा या ग्रामीण विकास विभाग के तहत तुरंत सड़क स्वीकृत कर काम शुरू किया जाए.
1000 लोगों की उम्मीद सड़क से जुड़ी
1000 लोगों का भविष्य एक पक्की सड़क पर अटका है. अब देखना होगा कि प्रशासन कब इस बुनियादी समस्या का समाधान करता है.
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