चिकित्सक के अभाव में बदहाल देवदांड़ पशु चिकित्सालय

14 पंचायतों के 17 हजार से अधिक पशुपालक परेशान

पोड़ैयाहाट प्रखंड के पूर्वी क्षेत्र की 14 पंचायतों को पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय, देवदांड़ स्वयं बदहाली का शिकार है. अस्पताल में मात्र एक पशु चिकित्सक डॉ. विकास कुमार पदस्थापित हैं, जो अतिरिक्त प्रभार के कारण क्षेत्र के पशुपालकों को नियमित सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं. इससे 17 हजार से अधिक पशुओं वाले इस क्षेत्र के पशुपालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार डॉ. विकास कुमार के पास देवदांड़ के अलावा सुंदरपहाड़ी प्रखंड के चंदना एवं सुंदरपहाड़ी पशु चिकित्सालय का भी अतिरिक्त प्रभार है. इसके कारण वे महीने में कभी-कभार ही देवदांड अस्पताल पहुंच पाते हैं. नतीजतन क्षेत्र के पशुओं का उपचार भगवान भरोसे चल रहा है.

दवा उपलब्ध, लेकिन डॉक्टर के अभाव में नहीं मिल रहा लाभ

अस्पताल में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता है, लेकिन चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण उनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है. अस्पताल में केवल एक नाइट गार्ड की तैनाती है, जिसके भरोसे व्यवस्था संचालित हो रही है. स्थानीय पशुपालक नीलांबर कुमार, मनोरंजन मंडल, राजेश कुमार, मनोज कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के नाइट गार्ड पशुओं का इलाज या दवा कैसे दे सकता है. पशुओं में बुखार, प्रसव संबंधी समस्याएं अथवा खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियां होने पर लोग अस्पताल का चक्कर लगाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि सप्ताह में एक दिन भी चिकित्सक नियमित रूप से अस्पताल पहुंच जायें तो उन्हें काफी राहत मिलेगी. वर्तमान स्थिति में पशुपालकों को महंगे निजी चिकित्सकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. पशुपालकों ने बताया कि प्रथम वर्गीय अस्पताल होने के बावजूद यहां सर्जरी, टीकाकरण और प्रसव जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावी ढंग से उपलब्ध नहीं हैं. एक पशु की मौत से गरीब किसान की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है, लेकिन संबंधित विभाग इस समस्या के समाधान की दिशा में पर्याप्त पहल नहीं कर रहा है.

अतिरिक्त प्रभार के कारण नहीं मिल पाता समय : चिकित्सक

इस संबंध में पशु चिकित्सक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि उन्हें तीन अस्पतालों का प्रभार सौंपा गया है. इसके अलावा प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी से संबंधित कार्यों का भी अतिरिक्त दायित्व है. इसी कारण सभी स्थानों पर नियमित रूप से समय देना संभव नहीं हो पाता. ग्रामीणों एवं पशुपालकों ने सरकार से देवदांड़ प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में अलग पशु चिकित्सक एवं कंपाउंडर की नियुक्ति करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि शीघ्र व्यवस्था नहीं की गयी तो 14 पंचायतों के हजारों पशुपालकों को सरकारी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा और उन्हें निजी चिकित्सकों पर निर्भर होना पड़ेगा.

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Author: SANJEET KUMAR

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