गोड्डा सदर अस्पताल ब्लड बैंक में खून की भारी कमी, मरीजों को गंभीर संकट

थैलेसीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया व ल्यूकेमिया से जूझ रहे बच्चों के लिए रक्त की उपलब्धता न्यूनतम

गोड्डा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में इन दिनों सन्नाटा पसरा है, लेकिन इस शांति के बीच सैकड़ों थैलेसीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया, ल्यूकेमिया और एचआईवी से जूझ रहे बच्चों और उनके परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. जिले में लगभग 125 से अधिक पंजीकृत थैलेसीमिया और अन्य गंभीर मरीज हैं, जिन्हें हर 15-20 दिन में ताजा खून की आवश्यकता होती है. वर्तमान में ब्लड बैंक में स्टॉक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है. सूत्रों के अनुसार, फरवरी के तीसरे सप्ताह तक रक्त की उपलब्धता महज 4 यूनिट के करीब रह गयी थी. सबसे अधिक संकट ओ नेगेटिव और बी नेगेटिव जैसे दुर्लभ ब्लड ग्रुप्स में है. अधिकांश मरीज सरकारी ब्लड बैंक पर निर्भर हैं और इनमें बड़ी संख्या बच्चे हैं. तकनीकी नियम और डोनर्स की कमी संकट बढ़ा रही है. हाल ही में राज्य स्तर पर ब्लड बैंकों की जांच के बाद नियमों में सख्ती बरती गयी है. गोड्डा ब्लड बैंक में अब रैपिड टेस्ट की बजाय एलाइजा मशीन द्वारा अनिवार्य परीक्षण के बाद ही खून चढ़ाया जा रहा है. तकनीकी अपग्रेडेशन और डोनर्स की कमी के बीच यह संकट और गहरा गया है.

ब्लड बैंक के प्रमुख एलटी मिलन नाग ने बताया कि रक्त की कमी को लेकर लगातार पहल की जा रही है और बार-बार लोगों से अपील की जा रही है, लेकिन फिलहाल स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है.

सामाजिक संस्थाओं और युवाओं से अपील

स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय समाजसेवियों ने जिले के युवाओं से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की है. थैलेसीमिया मरीजों के लिए रिप्लेसमेंट डोनर लाना गरीब परिवारों के लिए अक्सर असंभव होता है. ऐसे में लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे सदर अस्पताल में रक्तदान कर बच्चों और अन्य गंभीर मरीजों की जान बचाने में मदद करें. इस आपातकालीन स्थिति में जिले के हर नागरिक की भागीदारी मरीजों की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है.

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By SANJEET KUMAR

SANJEET KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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